वीरेंद्र कुमार, नालंदा। राजनीति में अक्सर सत्ता और स्वार्थ के रिश्ते बनते-बिगड़ते देखे जाते हैं, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो वक्त की हर कसौटी पर खरे उतरते हैं। ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य रविवार को नालंदा जिले के रहुई प्रखंड के अंतर्गत आने वाले सोनसा गांव में देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार पूरे 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सोनसा गांव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने उस पुराने और भरोसेमंद राजनीतिक साथी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने उनके शुरुआती संघर्ष के दिनों से लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के सफर में हर कदम पर मजबूत ढाल बनकर साथ निभाया था।
प्रतिमा अनावरण और भावुक पल
सोनसा गांव के बड़की खलिहान तालाब परिसर में एक भव्य और गरिमामयी समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नीतीश कुमार थे। यहां उन्होंने अपने शुरुआती दिनों के रणनीतिकार और परम सहयोगी स्वर्गीय केदार प्रसाद तथा उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय सरस्वती देवी की प्रतिमाओं का अनावरण किया। अपने प्रिय नेता की एक झलक पाने और इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय लोग और जदयू कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल पर जुट चुके थे।
कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने लगभग 15 मिनट तक परिसर में समय बिताया। इस दौरान वे पूरी तरह से पुराने दिनों की यादों में खोए नजर आए। उन्होंने स्वर्गीय केदार प्रसाद के परिजनों से मिलकर उनका हालचाल जाना, पुरानी स्मृतियों को साझा किया और वहां उपस्थित सभी लोगों का हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया। पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर पौधारोपण भी किया, जो इस आयोजन का एक अन्य मुख्य आकर्षण रहा।
संघर्ष के दिनों का अटूट साथी
स्वर्गीय केदार प्रसाद के छोटे पुत्र डॉ. राकेश कुमार उर्फ पिंटू ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपने पिता और नीतीश कुमार के पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन की शुरुआत से लेकर उनके मुख्यमंत्री बनने तक के सफर में हमेशा रीढ़ की हड्डी की तरह काम किया। स्वर्गीय केदार प्रसाद न केवल उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक थे, बल्कि वे उनकी रणनीतियों के अहम हिस्सा भी रहे। क्षेत्र की आम जनता की समस्याओं को बेबाकी से सरकार तक पहुंचाने में उनकी भूमिका हमेशा अग्रणी रही। अपने माता-पिता की स्मृति को चिरस्थायी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनाने के उद्देश्य से ही परिवार ने दोनों की प्रतिमाओं को एक ही परिसर में स्थापित कराया है।
प्रशासनिक चौकसी और गणमान्य लोगों की उपस्थिति
पूर्व मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह मुस्तैद था। वीआईपी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। इस अवसर पर जदयू के राष्ट्रीय महासचिव इंजीनियर सुनील कुमार, स्थानीय अस्थावां विधायक, रहुई प्रखंड अध्यक्ष संजय कुमार पटेल, समाजसेवी डॉ. राकेश रंजन, उप प्रमुख राकेश रंजन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पार्टी कार्यकर्ता और क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे। 13 साल बाद गांव में हुए इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जमीनी स्तर के पुराने और सच्चे सियासी रिश्ते समय की सीमा से परे होते हैं।


