Technology Desk. भारत अब सेमीकंडक्टर यानी चिप मैन्युफैक्चरिंग में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य को लेकर एक बड़ा रोडमैप साझा किया है। सरकार का लक्ष्य अगले 8 वर्षों में 7nm से लेकर 3nm जैसी एडवांस चिप टेक्नोलॉजी विकसित करना है।

40nm से 3nm तक का लक्ष्य

फिलहाल भारत में 40nm स्तर की चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित हो रही है। लेकिन आज के स्मार्टफोन, AI सर्वर, इलेक्ट्रिक वाहन और दूसरे हाई-टेक डिवाइस के लिए 7nm और 3nm जैसी ज्यादा एडवांस चिप्स की जरूरत होती है।

सरकार अब रिसर्च, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करते हुए 40nm से एडवांस नोड्स की तरफ बढ़ने की तैयारी कर रही है। 3nm तक पहुंचना आसान नहीं होगा, लेकिन इसे लंबे समय के टेक्नोलॉजी मिशन के तौर पर देखा जा रहा है।

Semicon 2.0 पर बड़ा निवेश

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण ‘Semicon 2.0’ है। इसके लिए करीब 1.275 लाख करोड़ रुपये के निवेश का रोडमैप तैयार किया गया है।

इसका फोकस सिर्फ चिप फैक्ट्री लगाने पर नहीं है। इसमें:

चिप डिजाइन और R&D
वेफर मैन्युफैक्चरिंग
चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग
सेमीकंडक्टर उपकरण
रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर
कुशल इंजीनियरों की ट्रेनिंग
जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

गुजरात बन रहा सेमीकंडक्टर हब

भारत में चिप मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हिस्सा गुजरात में विकसित हो रहा है। धोलेरा में Tata Electronics और ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation (PSMC) की साझेदारी में बड़ी वेफर फैब फैसिलिटी तैयार की जा रही है। इस प्रोजेक्ट में करीब 91,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है।

वहीं, साणंद में Micron की असेंबली और टेस्ट फैसिलिटी भी भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत कर रही है।

1 लाख चिप डिजाइन इंजीनियर तैयार करने की योजना

एडवांस चिप बनाने के लिए सिर्फ फैक्ट्री और मशीनें काफी नहीं हैं। इसके लिए बड़ी संख्या में चिप डिजाइन इंजीनियर और सेमीकंडक्टर एक्सपर्ट भी चाहिए।

सरकार आने वाले वर्षों में करीब 1 लाख युवाओं को सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग में प्रशिक्षित करने की दिशा में काम कर रही है। इसका मकसद भारत की मजबूत IT और इंजीनियरिंग टैलेंट को चिप इंडस्ट्री से जोड़ना है।

3nm चिप से क्या बदलेगा?

अगर भारत 7nm और आगे चलकर 3nm जैसी टेक्नोलॉजी में सफल होता है, तो इसका असर सिर्फ चिप इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा।

छोटी नोड वाली चिप्स आम तौर पर ज्यादा ट्रांजिस्टर को कम जगह में पैक कर सकती हैं, जिससे बेहतर परफॉर्मेंस और पावर एफिशिएंसी हासिल की जा सकती है। इसका फायदा AI, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर, मेडिकल टेक्नोलॉजी और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में मिल सकता है।

हालांकि, भारत को 3nm जैसी अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी तक पहुंचने के लिए कई तकनीकी और औद्योगिक चुनौतियों का सामना करना होगा। इसके लिए बड़े निवेश के साथ-साथ लंबे समय तक रिसर्च, एडवांस मशीनरी, मटेरियल सप्लाई चेन और विशेषज्ञों की जरूरत होगी।

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