हरियाणा के नूंह जिले के अंतर्गत आने वाले बझेड़ा गांव का सरकारी स्वास्थ्य उपकेंद्र लगातार बंद रहने की वजह से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्वास्थ्य विभाग की इस कथित लापरवाही के कारण मजबूर ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करवाने को विवश हैं।
सोनू वर्मा नूंह। जिले के गांव बझेड़ा में स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही अब ग्रामीणों की सेहत पर भारी पड़ती नजर आ रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उजीना के अधीन आने वाला स्वास्थ्य सब सेंटर अधिकांश समय बंद रहने के आरोपों के घेरे में है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ रहा है या फिर करीब 10 किलोमीटर दूर अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बझेड़ा में Nuh Health Sub Center Locked होने के इस गंभीर मामले की वजह से पूरे इलाके के लोग स्वास्थ्य महकमे के खिलाफ बेहद नाराज दिखाई दे रहे हैं।
सप्ताह में सिर्फ दो दिन खुलता है केंद्र
ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि बझेड़ा के इस स्वास्थ्य उपकेंद्र पर विभाग द्वारा एक सीएचओ डॉ. धर्मेंद्र और एक एएनएम की आधिकारिक तैनाती की गई है। इसके बावजूद तैनात डॉक्टर सप्ताह में केवल दो दिन ही कुछ समय के लिए यहाँ आते हैं और अपनी हाजिरी लगाकर चले जाते हैं। बाकी के अन्य दिनों में इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य द्वार पर बड़ा सा ताला लटका रहता है। स्वास्थ्य उपकेंद्र के इस तरह बंद रहने का सबसे ज्यादा खामियाजा गांव के बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
कई गांवों के मरीजों की जान जोखिम में
ग्रामीणों का कहना है कि बझेड़ा स्वास्थ्य सब सेंटर पर सिर्फ बझेड़ा ही नहीं बल्कि देवला नंगली, भोपावली और सुल्तानपुर सहित कई आसपास के गांवों के लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जब सरकारी केंद्र बंद मिलता है तो लोगों को मजबूरन गांवों में बैठे झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है, जिससे मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ सकती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार गांव-गांव बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के दावे करती है, लेकिन बझेड़ा की तस्वीर इन दावों की पोल खोल रही है। सरकारी भवन तो बना है, लेकिन यदि डॉक्टर ही नियमित नहीं मिलें तो यह केंद्र ग्रामीणों के लिए किसी बंद इमारत से ज्यादा नहीं रह जाता।
चिकित्सा अधिकारी ने दिए जांच के आदेश
इस बेहद गंभीर लापरवाही के मामले में जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उजीना की मेडिकल ऑफिसर निशा यादव से सीधी बात की गई तो उन्होंने बताया कि बझेड़ा सब सेंटर पर डॉ. धर्मेंद्र (CHO) और एक एएनएम तैनात हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एएनएम की ड्यूटी ज्यादातर फील्ड में रहती है, जबकि डॉक्टर को नियमित रूप से स्वास्थ्य केंद्र पर बैठकर मरीजों को सेवाएं देनी होती हैं। मेडिकल ऑफिसर ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं और डॉक्टर नियमित रूप से केंद्र पर उपस्थित नहीं रहते हैं, तो मामले की त्वरित जांच कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।

