Odisha :भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार द्वारा राज्यवासियों के कल्याण के लिए एक से बढ़कर एक नई योजनाओं की घोषणाओं के बीच राज्य के खजाने पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में राज्य का बजट बढ़कर रिकॉर्ड 3.10 लाख करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2026-27) के स्तर पर पहुंच गया है. हालांकि, बजट के इस भारी-भरकम आकार के मुकाबले राजस्व संग्रह में अपेक्षित वृद्धि न होना और आगामी 8वें वेतन आयोग की संभावित सिफारिशें राज्य की वित्तीय स्थिति के लिए बड़ी चुनौती बनती दिख रही हैं.
भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद कई महत्वाकांक्षी और जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं, जिन पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं.
सुभद्रा योजना: 19 से 59 वर्ष की 1 करोड़ महिलाओं को प्रति वर्ष 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता. 2024 से 2029 के बीच इस योजना पर लगभग 56,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
विकसित गांव विकसित ओडिशा: 2036 तक ग्रामीण विकास के लक्ष्य के साथ अगले 5 वर्षों के लिए 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान. इसके तहत ग्रामीण सड़कें, पुल और स्कूलों का उन्नयन किया जाएगा.
केजी से पीजी मुफ्त शिक्षा: साक्षरता दर बढ़ाने और सार्वभौमिक शिक्षा के लिए 5 वर्षों में 5,467.55 करोड़ रुपये का आवंटन, जिससे सालाना 32 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित होंगे.
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना: 3 फरवरी 2026 को गंजम के मां तारातारिणी पीठ से शुरू इस योजना में दुल्हन को 60,000 रुपये तथा सामूहिक विवाह व्यवस्था के लिए प्रति जोड़े 5,000 रुपये दिए जा रहे हैं.
हाल ही में घोषित प्रमुख नई योजनाएं और बजटीय प्रावधान:
श्री जगन्नाथ इंटरप्रिटेशन सेंटर, पुरी
₹1,000 करोड़
ब्रह्मपुर-जयपुर 287 किमी सड़क मार्ग
₹9,000 करोड़
मुख्यमंत्री स्मार्ट सिटी मिशन
₹100 करोड़
राज्य एआई (AI) मिशन
₹23 करोड़
रेयर अर्थ कॉरिडोर
₹10 करोड़
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना
बच्ची के जन्म पर ₹20,000 संचय और स्नातक के बाद ₹1,00,001
इसके अलावा सीएम किसान, मधुबाबू पेंशन, अन्वेषा योजना, बाणीश्री योजना, ओडिशा रोजगार योजना, गोपबंधु पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना, और ‘मिशन पावर’ जैसी योजनाएं भी जारी हैं.
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि लोकलुभावन योजनाओं पर खर्च तेजी से बढ़ा है, लेकिन उस अनुपात में राज्य का अपना राजस्व नहीं बढ़ रहा है. ऊपर से भविष्य में लागू होने वाले 8वें वेतन आयोग के कारण सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन बिल में भारी बढ़ोतरी होगी. ऐसे में विकास कार्यों की गति बनाए रखने के साथ-साथ वित्तीय संतुलन बनाए रखना राज्य सरकार के लिए एक कठिन परीक्षा साबित होगी.
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