भुवनेश्वर: ओडिशा के अगले पुलिस महानिदेशक (DGP) के चयन को लेकर राज्य में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठता सूची में फेरबदल करने और अपने पसंदीदा अधिकारी को दौड़ में आगे लाने के आरोपों के बीच यह मामला अब देश की सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही है।
चिदंबरम ने अदालत में आरोप लगाया कि ओडिशा सरकार DGP पद के चयन के लिए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह दिशा-निर्देशों (2006) का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नियम दरकिनार कर पहले एडीजी स्तर के अधिकारी को आनन-फानन में डीजी (DG) रैंक में पदोन्नत किया और फिर उनका नाम UPSC को भेजे जाने वाले नए पैनल में शामिल करने का प्रयास किया।
पदोन्नति के बाद बढ़ा विवाद
सोमवार को राज्य सरकार ने 1994 बैच के दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों, संजीव पांडा और यशवंत जेठवा को एडीजी से डीजी रैंक (लेवल-16) में पदोन्नति दी। पहले वरिष्ठता के आधार पर सुधांशु सारंगी, सुशांत नाथ और आर.पी. कोचे के नाम रेस में सबसे आगे थे।
राज्य सरकार द्वारा नए अधिकारियों को पदोन्नति दिए जाने के बाद संजीव पांडा को नए DGP के रूप में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। आरोप है कि सरकार अपने पसंदीदा अधिकारी को शीर्ष पद पर बैठाने के लिए सूची में बार-बार बदलाव कर रही है।
UPSC की आपत्ति और सूची वापस लेना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, UPSC ने 7 अगस्त की बैठक में स्पष्ट किया था कि केवल DGP स्तर (लेवल-16) के अधिकारियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद राज्य सरकार ने अपनी पुरानी सूची वापस ले ली थी और 1994 बैच के अफसरों को पदोन्नत कर एक नया पैनल तैयार किया।
वर्तमान DGP वाई.बी. खुरानिया 16 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि ओडिशा के नए पुलिस प्रमुख का चयन नियमों के तहत हो रहा है या सरकार को अपनी सूची में फिर से संशोधन करना पड़ेगा।
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