Dharm Desk – जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल सलीला से लेकर उनके भक्तवत्सल रूप तक की कथाएं सुनना विशेष माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्री कृष्ण का एक ऐसा रूप भी है, जहां उन्हें ‘साक्षी’ यानी गवाह बनने वाले भगवान के नाम से पूजा जाता है? यह कथा एक ऐसे भक्त की है, जिसके सत्य और वचन की रक्षा के लिए भगवान स्वयं उसके साथ चल पड़े थे । इस अद्भुत प्रसंग का संबंध वृंदावन से शुरू होता है और आज प्रसिद्ध साक्षी गोपाल मंदिर ओडिशा के सत्यबादी में स्थित है।

साक्षी गोपाल की प्रसिद्ध कथा
कथा के अनुसार, दो ब्राह्मण तीर्थयात्रा करते हुए वृंदावन पहुंचे। इनमें एक वृद्ध और दूसरा युवा ब्राह्मण था। यात्रा के दौरान युवा ब्राह्मण ने वृद्ध की पूरी श्रद्धा से सेवा की । उसकी सेव से प्रसन्न होकर वृद्ध ब्राह्मण ने अपनी बेटी का विवाह उसी युवक से करने का वचन दिया।यह वचन भगवान गोपाल के सामने दिया गया था। लेकिन घर लौटने के बाद जब परिवार को इस विवाह की जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध कर दिया। परिवार के दवाव में वृद्ध ब्राह्मण अपने वचन से पीछे हट गए। युवा ब्राह्मण ने कहा- वृंदावन में भगवान गोपाल के सामने शादी का वचन दिया गया था, इसलिए भगवान स्वयं इस बात के साक्षी हैं।
भक्त की पुकार पर भगवान चल पड़े
- युवा ब्राह्मण दोवारा वृंदावन पहुंचा और भगवान गोपाल से अपनी बात की सच्चाई सिद्ध करने के लिए साथ चलने की प्रार्थना की। कथा के अनुसार भगवान भक्त की श्रद्धा से प्रसन्न हुए और उसके साथ जाने के लिए तैयार हो गए।
- भगवान ने युवक ब्राह्मण के साथ चलने के लिए हां तो बोलते लेकिन एक शर्त भी रखी। वह रास्ते में पीछे मुड़कर उन्हें न देखे। युवक आगे चलता रहा और भगवान उसके पीछे-पीछे चलते रहे।
- एक दिन जब युवक को भगवान के कदमों की आहट सुनाई नहीं दी तो उसने पीछे मुड़कर देखा। और उसके साथ ही उसी स्थान पर भगवान गोपाल विराजमान हो गए। बाद में भगवान ने ब्राह्मण के वचन की गवाही दी और सत्य की जीत हुई।
आज ओडिशा में विराजमान हैं साक्षी गोपाल
इसी कथा के कारण भगवान गोपाल का नाम साक्षी गोपाल प्रसिद्ध हुआ। यहां ‘साक्षी’ का अर्थ है, सत्य के प्रमाण के रूप में उपस्थित रहने वाला।
आज इस कथा से प्रसिद्ध साक्षी गोपाल मंदिर ओडिशा के पुरी जिले के सत्यबादी में स्थित है। इसलिए कथा में आने वाले दोनों स्थानों को अलग-अलग समझना जरूरी है- वृंदावन वह स्थान है जहां वृद्ध ब्राह्मण ने भगवान गोपल के सामने वचन दिया था, जबकि ओडिशा का सत्यबादी आज साक्षी गोपाल के प्रसिद्ध मंदिर के लिए जाना जाता है।जन्माष्टमी पर साक्षी गोपाल की यह कथा भगवान श्रीकृष्ण के उस रूप की याद दिलाती है, जिसमें वे केवल भक्तों के आराध्य ही नहीं, बल्कि अपने भक्त के सत्य और विश्वास के रक्षक भी बन जाते है, यही कारण है कि साक्षी गोपाल की कथा आज भी भक्तों के बीच विशेष श्रद्धा से सुनाई जाती है।



