Dharm Desk – आज कल घर की साज-सजावट में भगवान बुद्ध की प्रतिमा का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ये न केवल घर की सुंदरता को बढ़ाती है, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार, सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। माना जाता है, कि सही दिशा और सही तरीके से लॉर्ड ऑफ बुद्धा रखने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक सुकून आता है। वहीं, गलत स्थान का चयन या गलत तरीके से रखने पर इसके विपरीत प्रभाव भी पड़ सकते है। ऐसे में जरूरी है कि बुद्ध की मूर्ति को वास्तु के नियमों के अनुसार ही घर ऑफिस मकान या दुकान में स्थान देना चाहिए।

कैसे रखें बुद्ध की प्रतिमा
- मुख्य द्वार पर आशीर्वाद मुद्रा में बुद्ध की प्रतिमा लगाना बेहद शुभ माना जाता है, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है।
- बुद्ध की मूर्ति को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए । इसे हमेशा फर्श से 3-4 फीट ऊपर रखें।
- घर की पश्चिम दिशा में दाईं ओर झुकी हुई बुद्ध प्रतिमा रखना शांति और संतुलन बनाए रखता है।
- घर के मंदिर में बुद्ध की मूर्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, इससे मानसिक शांति मिलती है।
- बच्चों के स्टडी रूम में पूर्व दिशा की ओर मुख करके बुद्ध की मूर्ति रखने से एकाग्रता बढ़ती है।
- लिविंग रूम या डाइनिंग हॉल में हाथ जोड़े (प्रार्थना मुद्रा) वाली प्रतिमा रखने से वास्तु दोष कम होते हैं।
बुद्ध की प्रतिमा रखने के फायदे
- घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।
- मानसिक तनाव और चिंता कम होती है।
- घर में सुखसमृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।
- परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और शांति बढ़ती है।
- बच्चों की पढ़ाई में एकाग्रता और सफलता मिलती है।
बुद्ध की प्रतिमा कब रखें
- बुद्ध पूर्णिमा, गुरुवार या किसी शुभ मुहूर्त में प्रतिमा स्थापित करना उत्तम माना जाता है।
- सुबह के समय स्नान कर साफ मन से स्थापना करना अधिक शुभ होता है।
किस धातु की होनी चाहिए बुद्ध की मूर्ति
- पीतल (ब्रास) की बुद्ध प्रतिमा सबसे शुभ मानी जाती है।
- तांबे या संगमरमर की मूर्ति भी सकारात्मक ऊर्जा देती है।
- लकड़ी की मूर्ति भी घर के लिए अच्छा विकल्प है, खासकर सजावट के लिए।
प्रतिमा का आकार कितना होना चाहिए
- घर के लिए मध्यम आकार (लगभग 6 से 18 इंच) की मूर्ति सबसे उपयुक्त रहती है।
- बहुत बड़ी या बहुत छोटी प्रतिमा से बचना चाहिए, संतुलित आकार ही बेहतर होता है।
बुद्ध प्रतिमा किन लोगों को जरूर रखनी चाहिए
- जिन लोगों के जीवन में तनाव और चिंता अधिक रहती है।
- जिनके घर में बार-बार झगड़े होते ह।
- पढ़ाई में ध्यान न लगाने वाले बच्चों के लिए।
- व्यापार या नौकरी में रुकावट झेल रहे लोगों के लिए।

