कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के स्कूल शिक्षा विभाग में इन दिनों एक कुर्सी पर दो अधिकारियों के दावे को लेकर अजीबोगरीब स्थिति बन गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद संयुक्त संचालक अरविंद सिंह ने ऑफिस पहुंचकर जॉइनिंग कर ली, लेकिन शासन के आदेश पर पद संभाल चुके हरिओम चतुर्वेदी भी संयुक्त संचालक की कुर्सी नहीं छोड़ रहे हैं। अब हालात ऐसे हैं कि एक ही ऑफिस में दो-दो संयुक्त संचालक मौजूद हैं और पूरा शिक्षा विभाग इसी चर्चा में जुटा है कि आखिर सही कौन है।
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दरअसल सिरोल स्थित संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर ऑफिस में इन दिनों टकराव की स्थिति देखने को मिल रही है। नियमित संयुक्त संचालक अरविंद सिंह ने अपने तबादले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने उनके तबादला आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें ग्वालियर में ही पद पर कार्य जारी रखने के निर्देश दिए। कोर्ट ने शासन से यह भी सवाल किया कि आखिर ऐसी कौन-सी आवश्यकता थी, जिसके चलते नियमित अधिकारी को हटाकर जूनियर अधिकारी को प्रभारी बनाया गया। अदालत ने प्रमुख सचिव से इस पूरे मामले में जवाब भी तलब किया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अरविंद सिंह ऑफिस पहुंचे और जॉइनिंग कर ली। लेकिन शासन के पूर्व आदेश के आधार पर हरिओम चतुर्वेदी भी खुद को संयुक्त संचालक मानते हुए उसी कुर्सी पर बैठे हुए हैं,हरिओम चतुर्वेदी का कहना है कि उन्हें विभाग की ओर से कार्यमुक्त किए जाने का कोई आदेश नहीं मिला है, इसलिए उनकी जॉइनिंग पूरी तरह वैध है। वहीं अरविंद सिंह का कहना है कि उन्होंने न्यायालय के आदेश के आधार पर पद संभाला है, इसलिए वही नियमित संयुक्त संचालक हैं।इस पूरे घटनाक्रम के बीच ऑफिस में विचित्र स्थिति बन गई है। संयुक्त संचालक की कुर्सी पर हरिओम चतुर्वेदी बैठ रहे हैं,जबकि अरविंद सिंह को सहायक सांख्यिकी अधिकारी गौरी सिंह के चेंबर में बैठकर काम करना पड़ रहा है। एक ही कार्यालय में दो-दो संयुक्त संचालकों की मौजूदगी से कर्मचारी भी असमंजस में हैं कि आखिर किसके आदेश का पालन करें। शिक्षा विभाग में अब यही चर्चा है कि “एक कुर्सी और दो जॉइंट डायरेक्टर” की इस स्थिति का समाधान आखिर कब और कैसे निकलेगा।
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बहरहाल हाईकोर्ट के आदेश और शासन के आदेश के बीच फंसे इस विवाद ने लोक शिक्षण विभाग में प्रशासनिक असमंजस पैदा कर दिया है। अब सभी की नजर शासन के जवाब और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि उसी के बाद तय होगा कि संयुक्त संचालक की कुर्सी पर आखिर अधिकार किसका होगा।
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