विकास कुमार, सहरसा। बिहार के कोसी क्षेत्र में पुलिस मुख्यालय के विशेष निर्देश पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन तलाश’ अभियान के तहत लापता और अपहृत बच्चों की बरामदगी में बड़ी सफलता हासिल हुई है। कोसी क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक के कुशल नेतृत्व में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों में 20 अगस्त से 31 अगस्त 2026 के बीच ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कुल 77 गुमशुदा बच्चों को सुरक्षित ढूंढ निकाला गया है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल खोए हुए बच्चों को उनके परिवारों से मिलाना है, बल्कि बाल संरक्षण को मजबूत करना भी है।

​जिलेवार बरामद बच्चों के आंकड़े

​इस विशेष अभियान के दौरान तीनों जिलों की पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अलग-अलग संख्या में बच्चों को बरामद किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सहरसा जिले से कुल 27 बच्चों को खोज निकाला गया। वहीं, सुपौल जिले में कार्रवाई करते हुए 21 बच्चों को सुरक्षित बरामद किया गया और मधेपुरा जिले में सबसे अधिक 29 बच्चों को पुलिस ने सकुशल ढूंढ निकाला। इस प्रकार कुल 77 बच्चों को उनके घरों तक पहुंचाया गया है।

​कानूनी प्रक्रिया और परिजनों को सुपुर्दगी

​बरामदगी के बाद पुलिस ने सभी आवश्यक विधिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया। न्यायालय के स्पष्ट आदेशानुसार सभी बच्चों को उनके दुखी और चिंतित परिजनों अथवा संबंधित कानूनी प्राधिकार को विधिवत रूप से सौंप दिया गया। बच्चों के सुरक्षित घर लौटने पर उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है और उन्होंने पुलिस प्रशासन के इस संवेदनशील कदम की जमकर सराहना की है।

​अभियान की अवधि और इसके बहुआयामी उद्देश्य

​बिहार राज्यभर में यह विशेष ‘ऑपरेशन तलाश’ अभियान आगामी 20 अगस्त से 10 सितंबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इस महाअभियान का दायरा सिर्फ बच्चों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज में सक्रिय बाल श्रम, मानव तस्करी और अनैतिक गतिविधियों पर लगाम लगाना है। इसके अलावा, साइबर अपराध तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना भी इस पुलिसिया कार्रवाई का प्रमुख लक्ष्य है।

​फर्जी कॉल और नौकरी के झांसे से सावधान रहने की अपील

​पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और अपराध छिपाने की प्रवृत्ति से बचें। अनजान नंबरों से आने वाले फर्जी कॉल्स और विशेष तौर पर सरकारी या आकर्षक वेतन वाली नौकरी के झूठे झांसों से सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी गई है। पुलिस ने रेखांकित किया है कि सोशल मीडिया और फर्जी कॉल्स के जरिए नाबालिग बच्चियों को प्रेमजाल में फंसाकर दूसरे राज्यों में तस्करी करने के मामले अक्सर सामने आते हैं।

​समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

​प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बाल सुरक्षा और अपराध की रोकथाम केवल पुलिस का दायित्व नहीं है, बल्कि यह हर जिम्मेदार नागरिक का सामाजिक कर्तव्य है। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या बच्चे के लापता होने की सूचना मिलने पर तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में संपर्क करें। समाज में सुरक्षा, शांति और भाईचारा बनाए रखने के लिए जनसहयोग बेहद जरूरी है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।