विकास कुमार, सहरसा। ग्रामीण विकास और महिलाओं के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड स्थित ‘सवेरा जीविका दीदी अधिकार केंद्र’ में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस नई सुविधा के जुड़ने से अब इस क्षेत्र की लगभग 3,800 जीविका दीदियों को विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी ऑनलाइन सेवाएं उनके अपने केंद्र पर ही आसानी से मिलने लगेंगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को अब छोटे-छोटे कामों या दस्तावेजों के लिए दूर-दराज के सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे उनके समय और धन दोनों की बहुमूल्य बचत होगी।

​उद्घाटन समारोह और प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

इस बहुप्रतीक्षित कॉमन सर्विस सेंटर का उद्घाटन गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) श्लोक कुमार, प्रखंड परियोजना प्रबंधक (बीपीएम) श्वेता कुमारी और केंद्र की अध्यक्ष मंजू देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर जीविका के अन्य प्रशासनिक अधिकारी और कर्मी भी विशेष रूप से मौजूद रहे। प्रबंधक वित्त प्रेम शंकर और सामुदायिक समन्वयक रीता कुमारी सहित 50 से अधिक जीविका दीदियों ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और इसे अपने लिए एक बड़ी सौगात बताया।

​सीएससी के माध्यम से मिलने वाली प्रमुख डिजिटल सेवाएं

​इस अधिकार केंद्र पर खुलने वाले कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए जीविका दीदियों और स्थानीय ग्रामीणों को कई प्रकार की डिजिटल और जनहित सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। इन प्रमुख सेवाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ​जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन
  • ​जाति, आय और निवास प्रमाण-पत्र बनवाने की सुविधा
  • ​नया राशन कार्ड बनवाने या उसमें संशोधन हेतु आवेदन
  • ​सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से जुड़े कार्य और आवेदन
  • ​विभिन्न सरकारी पोर्टलों पर उपलब्ध अन्य डिजिटल और ई-गवर्नेंस सेवाएं

​महिला सशक्तिकरण और डिजिटल साक्षरता की ओर कदम

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जिला परियोजना प्रबंधक श्लोक कुमार ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल की महिलाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ना है। जब महिलाएं डिजिटल रूप से सक्षम होंगी, तो वे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शिता के साथ प्राप्त कर सकेंगी। उन्होंने बताया कि सवेरा जीविका दीदी अधिकार केंद्र से जुड़ी सभी 3,800 महिलाओं को अब स्थानीय स्तर पर ही सभी प्रकार की ऑनलाइन सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और वे आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश करेंगी।