संजय पाटीदार, भोपाल। प्रदेश में आगामी 20 जुलाई से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है।मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र मात्र 5 दिनों के लिए बुलाया गया है। लेकिन उससे पहले सियासत भी शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह केवल विधानसभा की अवधि कम करने का सवाल नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही को सीमित करने का प्रयास है।
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प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों से चुनकर आए विधायक 7 करोड़ से अधिक जनता की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं। किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे अनगिनत मुद्दे प्रदेश के सामने खड़े हैं। क्या इन सभी विषयों पर गंभीर चर्चा, प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और जनहित के मुद्दों को केवल 5 बैठकों में समेटा जा सकता है?
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सरकार को यह समझना होगा कि विधानसभा जितनी चलेगी, लोकतंत्र उतना मजबूत होगा। कांग्रेस विधायक दल मानसून सत्र के हर मिनट का उपयोग जनता के मुद्दों को उठाने और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे चर्चा से बचे, लेकिन जनता के सवालों से बच नहीं सकती।

