नवीन शर्मा, हासी .हरियाणा के हांसी में पानी की किल्लत को लेकर माहौल पूरी तरह गरमा गया है। चैनत गांव में पीने के पानी का संकट (Drinking Water Crisis) इतना बढ़ गया है कि गुरुवार को ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। भारी संख्या में किसान, महिलाएं और बुजुर्ग ट्रैक्टर मार्च (ractor March) निकालते हुए सीधे लघु सचिवालय पहुंच गए। आंदोलन कर रहे लोगों ने वहां लगे पुलिस के बैरिकेड्स तोड़ दिए और डीसी कार्यालय के ठीक सामने जमा हो गए। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए दफ्तर के गेट पर ही मटके फोड़ दिए। आपको बता दें कि इस समस्या को लेकर ग्रामीणों के धरने का आज 34वां दिन था। तेज बारिश के बावजूद लोग वहां से टस से मस नहीं हुए।

सचिवालय परिसर बना छावनी, दो घंटे तक मचा रहा हंगामा
ग्रामीणों के भारी गुस्से को देखते हुए पूरे लघु सचिवालय परिसर को पुलिस छावनी (Police Security) में बदल दिया गया। उग्र प्रदर्शनकारियों ने करीब दो घंटे तक डीसी ऑफिस के सामने डेरा डाले रखा। इस बीच कुछ युवाओं ने दफ्तर के अंदर घुसने की भी कोशिश की, लेकिन मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें सूझबूझ से रोक लिया। असल में प्रशासन का कहना है कि वे गांव के लिए अलग से पानी की पाइपलाइन (Water Pipeline) बिछाकर पानी दे देंगे। वहीं, ग्रामीण इस बात पर अड़े हैं कि जब तक उन्हें शहर को मिलने वाली मुख्य पाइपलाइन से साफ पानी नहीं जोड़ा जाता, तब तक वे अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
गंदा पानी लेकर पहुंचे किसान, अधिकारियों से बोले- खुद पीकर दिखाओ
हरियाणा किसान नेता विकास सीसर ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गांव के लोग लंबे समय से गंदा और बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीण अपने साथ गांव के कुएं और नलों का गंदा पानी भी डिब्बों में भरकर लाए थे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने वह गंदा पानी उपायुक्त (Deputy Commissioner) को दिखाते हुए कहा कि अगर यह पानी साफ है तो अधिकारी इसे खुद पीकर दिखाएं। जब डीसी ने वह पानी पीने से मना कर दिया, तो ग्रामीणों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया।
जब तक समाधान नहीं, तब तक जारी रहेगा आंदोलन
किसान नेता अशोक मलिक ने बताया कि इस प्रदर्शन में केवल चैनत गांव ही नहीं, बल्कि हरियाणा के दूसरे जिलों से आए किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया है। धरने पर बैठी महिलाओं ने साफ कहा कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए उन्हें हफ्तों से सड़कों पर बैठना पड़ रहा है। करीब दो घंटे के भारी हंगामे के बाद उपायुक्त राहुल नरवाल खुद प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और उनका मांग पत्र (Memorandum) लिया। इसके बाद अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ। हालांकि, ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक गांव के हर घर में साफ पानी की स्थायी सप्लाई शुरू नहीं होती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

