Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा में इस समय मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री और असमंजस का माहौल बना हुआ है। सरकार की तरफ़ से जारी ताज़ा ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट से अचानक 20 लाख से भी ज़्यादा लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। इस फ़ैसले के बाद से ही राज्य में जगह-जगह लोगों का गुस्सा और राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिल रही है।
यूं तो कई जिलों में लोगों के नाम कटे हैं, लेकिन मलकानगिरी, गंजाम और कटक में स्थिति सबसे ज़्यादा गंभीर है। आदिवासी बहुल मलकानगिरी जिले के सदर ब्लॉक और कालीमेला इलाकों में हज़ारों लोग BLO से नोटिस मिलने के बाद बेहद परेशान हैं। बिना किसी साफ़ जानकारी के नोटिस थमा दिए जाने से लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं कि उन्हें आख़िर कौन से कागज़ात जमा करने हैं। बढ़ते असंतोष को देखते हुए गंजाम जिला प्रशासन ने फ़िलहाल पंचायत स्तर पर होने वाली जन-शिकायत सुनवाई को अगले आदेश तक रोक दिया है।
आख़िर क्यों भेजे जा रहे हैं ये नोटिस?
प्रशासन का कहना है कि ये नोटिस उन लोगों को भेजे जा रहे हैं, जो सर्वे के दौरान मांगे गए 12 ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं दिखा पाए थे। इसके अलावा जिनका नाम साल 2002 की सूची में नहीं था, पर 2005 में दर्ज हुआ। जिनके नाम, उम्र या पते की स्पेलिंग में कोई गड़बड़ी है। जो सर्वे के वक्त अपने घर पर मौजूद नहीं मिले।
सही जानकारी न मिलने की वजह से दूर-दराज और गांव-देहात में रहने वाले लोग बुरी तरह परेशान हैं। जिनका नाम कट गया है, वे फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम जुड़वाने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया जटिल होने की वजह से भटकने को मजबूर हैं।
लोगों की सिर्फ़ एक ही मांग है; प्रशासन नियम और कागज़ी कार्रवाई को आसान बनाए, ताकि किसी भी जायज़ नागरिक का वोट देने का अधिकार न छिेने।
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