पाकिस्तान ब्रिक्स का सदस्य बनने के लिए मरा जा रहा है, पर उसकी राह में जो सबसे बड़ा दीवार बनकर खड़ा है वो भारत है. पाकिस्तान ने भी ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक उसका आवेदन मंजूर नहीं हुआ है. भारत ने इसका विरोध भी किया था. BRICS में नए सदस्यों को शामिल करने का फैसला आम सहमति से होता है. लेकिन भारत के वीटो की वजह से उसकी नहीं चली.
इस्लामाबाद ने 2023 में समूह की पूर्ण सदस्यता के लिए औपचारिक अनुरोध भी किया था, लेकिन आज तक पाकिस्तान BRICS का पूर्ण सदस्य नहीं बन पाया है.
पाकिस्तान की सदस्यता की राह में सबसे बड़ी राजनीतिक अड़चन भारत की सहमति को माना जाता है. भारत में आयोजित हो रहे BRICS समिट पर दुनियाभर की नजरें हैं. आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने भी दुनिया के सबसे शक्तिशाली आर्थिक गुट ‘BRICS’ में शामिल होने के लिए पूरा जोर लगाया था.
पाकिस्तान BRICS में केवल राजनीतिक वजहों से नहीं आना चाहता है, बल्कि आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा पाकिस्तान अपने लिए नए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और व्यापारिक रास्ते तलाश रहा है. खास बात यह है कि पाकिस्तान ने इसके लिए अलग-अलग प्रयास भी किए हैं.
पाकिस्तान ने BRICS समर्थित ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ में 580 मिलियन डॉलर यानि करीब 58 करोड़ डॉलर की भारी-भरकम हिस्सेदारी तक खरीद ली थी. लेकिन भारत के सामने उसकी एक चाल भी कामयाब नहीं हो सकी.
BRICS में नए पूर्ण सदस्य को शामिल करने का फैसला किसी वोटिंग बहुमत से नहीं, बल्कि सर्वसम्मति से होता है. मतलब यह है कि किसी भी मौजूदा सदस्य की गंभीर आपत्ति सदस्यता की राह मुश्किल बना सकती है.
वर्तमान में पाकिस्तान के अलावा तुर्की, बांग्लादेश और वियतनाम समेत 30 से अधिक देश इस समूह का हिस्सा बनने की रेस में शामिल हैं. ब्रिक्स में एंट्री को लेकर रूस में पाकिस्तान के राजदूत मोहम्मद खालिद जमाली ने तो सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनका देश समर्थन के लिए रूस और चीन के लगातार संपर्क में है.
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