इदरीश मोहम्मद, पन्ना। विकास की वेदी पर बलि चढ़े विस्थापितों का आक्रोश अब ‘चिता आंदोलन’ के रूप में फूट पड़ा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी जैसी महापरियोजनाओं से उजाड़े गए आदिवासियों और ग्रामीणों का आंदोलन आज सोमवार को चौथे दिन भी जारी रहा। आसमान से बरसती मूसलाधार बारिश भी आंदोलनकारियों के इरादों को डिगा नहीं सकी, भीगते हुए भी सैकड़ों आदिवासी महिलाएं और पुरुष अपनी जमीन और न्याय के हक के लिए मोर्चे पर डटे रहे।
इस बीच विस्थापितों की आवाज बुलंद करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक भ्रष्ट अधिकारियों को जेल नहीं भेजा जाता और विस्थापितों को उनका हक नहीं मिलता, तब तक यह अनशन खत्म नहीं होगा।
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आंदोलन में शामिल आदिवासी महिलाओं ने प्रशासन पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी दफ्तरों में कदम-कदम पर रिश्वत मांगी जाती है और विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है। जय किसान संगठन की मीडिया सेल के अनुसार, ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि विस्थापन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो, न्यायपूर्ण मुआवजा मिले और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
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