Bihar News: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव आज गुरुवार (14 मई) को भागलपुर पहुंचे, जहां उन्होंने विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुल के क्षतिग्रस्त होने से लोगों को हो रही भारी परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से पूछा कि क्या सरकार के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह नाव और स्टीमर का संचालन फ्रीम में करा सके।

‘एक हफ्ते में बन जाना चाहिए था पुल’

मीडिया से बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने कहा कि, नाव वाले एक बच्चे से 100 रुपए ले रहे हैं। शाम 5 बजे के बाद छात्रों के लिए कोई नाव नहीं होता है। नाव वालों से माफिया 300 रुपए ले रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार के पास इतने पैसे नहीं हैं कि नाव और स्टीमर फ्री किया जाए? सांसद ने कहा कि, पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को एक हफ्ते में बन जाना चाहिए था। चीन में 1 दिन में पुल बन जाता है, हम 15 दिनों में एक पाया नहीं बना सके।

हर दिन टूटकर गिर रहे हैं पुल- पप्पू यादव

पप्पू यादव ने कहा कि विक्रमशिला पुल पहले से जर्जर था और इसकी जानकारी लगातार दी जा रही थी। उन्होंने कई बार लोकसभा में पुल की स्थिति पर प्रश्न उठाए, लेकिन सरकार ने समय रहते मरम्मत नहीं करवाई। सांसद ने कहा कि बिहार में लगातार पुल टूटकर गिर रहे हैं और हर दिन कहीं न कहीं से ऐसी सूचना मिलती है।

3 मई की रात गिरा था स्लैब

गौरतलब है कि बीते 3 मई की रात 12:30 बजे आसपास भागलपुर से उत्तर बिहार को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। विक्रमशिला पुल के पाया नंबर 133 का एक स्लैब टूटकर गंगा नदी में गिर गया। हालांकि गनीमत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार के जान-माल की कोई क्षति नहीं पहुंची।

मिली जानकारी के अनुसार पहले विक्रमशिला पुल के पाया नंबर 133 पोल के पास धंसाव हुआ, जिसकी जानकारी मिलने के तुरंत बाद गाड़ियों के आवागमन को बंद कर दिया गया था। इसके कुछ देर बाद ही पुल का वह हिस्सा (133-134 के बीच का) स्लैब टूटकर नदी में गिर गया।

तीन महीने में पुल के रिकवर होने की बात

विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने पर बिहार राज्य पुल निगम के अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया था कि, साल 2001 में विक्रमशिला पुल को तैयार किया गया था, जो यूपी पुल निगम के द्वारा बनाया गया था। इस मामले में वहां के कार्यपालक अभियंता को निलंबित किया गया है।

उन्होंने कहा था कि, फिलहाल आवागमन के लिए नाव और स्टीमर की व्यवस्था की जा रही है। चार लाइन का पुल निर्माण किया जा रहा है। वो बनने पर सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने तीन महीने के अंदर विक्रमशिला पुल को रिकवर कराने बात कही थी।

हादसे का बना रहता है डर

स्थानीय लोगों का कहना है कि, विक्रमशिला सेतु के टूटने से सबसे ज्यादा परेशानी रोजमर्रा के यात्रियों के साथ-साथ शादी समारोह में शामिल होने वाले परिवारों को हो रही है। बावजूद इसके लोग हर मुश्किल को पार कर अपने रिश्तों और परंपराओं को निभाने में जुटे हुए हैं। लोगों का कहना है कि कई बार नावों पर क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण हादसे का डर भी बना रहता है, लेकिन मजबूरी में लोग यह खतरा मोल ले रहे हैं।

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