कुंदन कुमार, पटना। बिहार महिला आयोग की ओर से जारी नोटिस को लेकर पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि, उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है और वह महिलाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि राजनीति में होने वाले कथित शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।

पप्पू यादव ने कहा कि वे इन दिनों लगातार महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, जो कायदे से महिला आयोग को करना था। उन्होंने कहा कि, इस मुद्दे को मैंने सदन के पटल पर भी रखा, जो सरकारी आंकड़े, मीडिया रिपोर्ट्स के साथ बीजेपी नेता सुब्रह्मण्य स्वामी और मधु आदि के बयानों से संदर्भित था।

गलत तरीके से पेश किया गया बयान- सांसद

सांसद पप्पू यादव ने कहा कि, उन्होंने अपने बयान में यह मुद्दा उठाया था कि राजनीति में आने वाली महिलाओं को कई बार शोषण का सामना करना पड़ता है, और इसी संदर्भ में उन्होंने टिप्पणी की थी। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर पहले भी कई सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन उनके बयान को अलग तरीके से पेश कर विवाद खड़ा किया गया।

महिला आयोग पर ही उठाया सवाल

सांसद ने सवाल उठाया कि इसी तरह के अन्य बयानों या आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? जबकि उनके आवाज उठाने पर तुरंत नोटिस जारी कर दिया गया। महिला आयोग को बताना चाहिए कि पटना में नीट की छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या हुई, उसमें उन्होंने क्या किया? आयोग को नालंदा की उस घटना के बारे में भी बताना चाहिए, जिसमें सरेराह महिला के साथ रेप की कोशिश की गई। आयोग ने इस मामले में क्या किया?

पप्पू यादव ने आगे कहा कि सहरसा, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर समेत बिहार के तमाम हिस्सों में रहे बेटियों पर यौन अपराध के मुद्दे पर आयोग की भूमिका क्या रही? क्या कभी इन्होने संज्ञान लिया और अगर लिया तो उसका परिणाम क्या रहा? आज जब महिलाओं पर अत्याचार होता है, तब सिर्फ पप्पू यादव ही उनकी ढाल बनते हैं। उन्होंने कहा कि शिल्पी गौतम से लेकर मुजफ्फरपुर शेल्टर हाउस एवं राज्य के एप्सटीन मामले में महिला आयोग की निष्क्रियता क्यों है? जबकि हम महिलाओं की लड़ाई लड़ रहे हैं, तो हमें नोटिस भेज दिया।

अपमान करना उद्देश्य नहीं- पप्पू यादव

पप्पू यादव ने महिला सुरक्षा से जुड़े कई मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध एक गंभीर मुद्दा है और इस पर व्यापक स्तर पर चर्चा और कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मणिपुर, शिक्षा संस्थानों और अन्य जगहों पर सामने आए मामलों पर भी उतनी ही गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए आवाज उठाना है, न कि किसी का अपमान करना।

मीडिया की भूमिका पर भी उठाया सवाल

सांसद ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पूरे बयान को देखे बिना आंशिक अंशों के आधार पर खबरें चलाई जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि उनके पूरे वीडियो को देखा जाए ताकि उनके बयान का सही संदर्भ सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं और अपने बयान पर कायम हैं, लेकिन इसे गलत तरीके से प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष हमेशा महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए रहा है और आगे भी जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो वह खेद व्यक्त करते हैं, लेकिन उनका मकसद समाज में व्याप्त समस्याओं को उजागर करना था।

सांसद के इस बयान पर मचा है बवाल

बता दें कि सांसद पप्पू यादव ने हालही में महिलाओं को लेकर एक बेहद ही आपत्तिजनक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में आने के लिए कंप्रोमाइज करना पड़ता है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बेड (बिस्तर) से शुरू होता है, उनके इस बयान को लेकर बिहार महिला आयोग ने उन्हें नोटिस जारी करते हुए तीन दिनों के अंदर जवाब मांगा है।

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