पटना। बिहार के पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा को लेकर पटना हाईकोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने बिहार सरकार के उस पुराने आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसके तहत सांसद की सुरक्षा घटा दी गई थी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि पप्पू यादव को तत्काल प्रभाव से दोबारा Y+ (वाई प्लस) श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जाए। अदालत ने साफ किया कि बिना किसी ठोस आधार और बिना पक्ष सुने सुरक्षा में कटौती करना कानूनन गलत है।

​बिहार सरकार का फैसला था ‘मनमाना’ और कानून के खिलाफ

​इस पूरे मामले की सुनवाई पटना हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ ने की। अदालत ने बिहार सरकार द्वारा पिछले साल सितंबर में सुरक्षा घटाने के निर्णय पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने अपने आदेश में सरकार के इस कदम को पूरी तरह से ‘मनमाना’ करार दिया। जस्टिस जितेंद्र कुमार की बेंच ने कहा कि जब सरकार ने पप्पू यादव की सुरक्षा श्रेणी को कम किया, तब न तो उन्हें इसका कोई स्पष्ट कारण बताया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा कम करने से पहले उसे सूचित करना और उसका पक्ष जानना बेहद जरूरी है, जिसका इस मामले में उल्लंघन हुआ।

​सुरक्षा एजेंसियों के पास नहीं था खतरा कम होने का कोई सबूत

​हाईकोर्ट ने मामले के कानूनी पहलुओं को खंगालते हुए पाया कि बिहार सरकार के पास सुरक्षा घटाने का कोई तार्किक कारण नहीं था। अदालत ने टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर ऐसी कोई भी खुफिया या सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट मौजूद नहीं है, जो यह साबित कर सके कि सांसद पप्पू यादव पर मंडरा रहा जान का खतरा अब कम हो गया है। जब खतरा बरकरार था, तो सुरक्षा में कटौती करने का फैसला पूरी तरह से आधारहीन था। इसी वजह से अदालत ने गृह विभाग को निर्देश दिया है कि भविष्य में जब भी किसी की सुरक्षा की समीक्षा की जाए, तो सुरक्षा एजेंसियों की इनपुट रिपोर्ट और संबंधित व्यक्ति की बात को अनिवार्य रूप से सुना और समझा जाए।

​लॉरेंस बिश्नोई गैंग से मिल रही थीं लगातार धमकियां

​सांसद पप्पू यादव ने अदालत के समक्ष अपनी जान को गंभीर खतरा होने की बात दोहराई थी। उन्होंने अपनी याचिका में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि उन्हें कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग और देश के अन्य बड़े आपराधिक गिरोहों से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इसी खतरे को देखते हुए बिहार सरकार ने पहले 9 अगस्त 2025 को उनकी सुरक्षा को अपग्रेड करके Y+ श्रेणी का कर दिया था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि इसके महज डेढ़ महीने बाद, यानी 23 सितंबर 2025 को सरकार ने बिना कोई कारण बताए उनकी सुरक्षा को अचानक घटाकर दोबारा Y श्रेणी में डाल दिया था, जिसे अब कोर्ट ने बदल दिया है।

​सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर हाईकोर्ट आए थे सांसद

​अपनी सुरक्षा के इस संवेदनशील मसले को लेकर पप्पू यादव देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की थी कि अपराधियों से मिल रही धमकियों को देखते हुए उनकी वर्तमान सुरक्षा को बढ़ाकर Z (जेड) श्रेणी का किया जाए, क्योंकि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था उनकी जान की रक्षा के लिए नाकाफी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस समय हस्तक्षेप न करते हुए उन्हें पटना हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि स्थानीय स्तर पर सुरक्षा के आकलन के लिए हाईकोर्ट ही उचित आदेश पारित कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इसी निर्देश के बाद पप्पू यादव ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जहां अब उन्हें बड़ी राहत मिली है।