अजय सैनी, भिवानी. छोटी काशी के नाम से विश्व विख्यात भिवानी की पावन तपोभूमि परमहंस योगाश्रम धाम में अध्यात्म और भक्ति का एक अनूठा संगम देखने को मिला। श्रीश्री 1008 स्वामी भास्करानंद परमहंस महाराज की पावन पुण्यस्मृति में आयोजित आठ दिवसीय वार्षिक महोत्सव का समापन पूरे उत्साह, हर्षोल्लास एवं भक्तिमय माहौल में हुआ।
महोत्सव के अंतिम दिन हवन-यज्ञ और महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें भिवानी सहित दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने आहुति डालकर पुण्य लाभ कमाया और गुरु महाराज का आशीर्वाद ग्रहण किया। आठ दिनों तक चले इस आध्यात्मिक महाकुंभ के समापन अवसर पर सुबह से ही योगाश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण गूंजने लगा। विद्वान आचार्यों के सानिध्य में मुख्य हवन का आयोजन किया गया।
पाण्डाल में उपस्थित सैकड़ों भक्तों ने यज्ञ कुंड में समिधा और आहुतियां प्रदान कर विश्व कल्याण की कामना की। हवन की पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारे का शुभारंभ हुआ, जहां देर शाम तक श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर अत्यंत श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण किया। महोत्सव के समापन सत्र के दौरान तपोभूमि परमहंस योगाश्रम के पीठाधीश्वर और मुख्य वक्ताओं ने श्रद्धालुओं को मानव जीवन में गुरु के आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया।
तपोभूमि परमहंस योगाश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णानन्द सरस्वती महाराज व स्वामी मदन मोहन अलंकार ने कहा कि मानव जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह दिव्य ऊर्जा और प्रकाश हैं जो शिष्य को अज्ञानता के घोर अंधकार से निकालकर ज्ञान के आलोक की ओर ले जाते हैं। स्वामी भास्करानंद परमहंस महाराज जी का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी हमारे लिए एक मार्गदर्शक की तरह है। इस अवसर पर अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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