पटना के गांधी मैदान में आज दलित संगठन आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ आंदोलन के तहत दलित और पिछड़े वर्गों का बड़ा जुटान हो रहा है। समिति के संयोजक अमर आजाद के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से लोकभवन तक मार्च निकालेंगे। आंदोलनकारियों का मुख्य उद्देश्य दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने की मांग उठाना है। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम के तहत जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे पर बैरिकेडिंग की गई है।
आरक्षण पर अत्याचार और असमानता का मुद्दा
आंदोलन के दौरान संयोजक अमर आजाद ने कहा कि देश में आज भी दलित और आदिवासी समाज पर जातिगत अत्याचार हो रहे हैं। उच्च पदों पर आसीन दलित IAS-IPS अधिकारियों को भी उनकी जाति के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है। इसके बावजूद कुछ लोग एससी-एसटी आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने मांग की कि न्यायपालिका और निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए ताकि वास्तविक सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और नेताओं के बयान
इस ज्वलंत मुद्दे पर राज्य और केंद्र के प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:
- चिराग पासवान: आरक्षण को किसी की खैरात नहीं बल्कि एक संवैधानिक अधिकार बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक वे और उनका परिवार मोदी सरकार का हिस्सा है, कोई भी ताकत आरक्षण को समाप्त नहीं कर सकती।
- जीतन राम मांझी: उन्होंने आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था पर बात करते हुए कहा कि इसका लाभ कुछ विशेष वर्ग के लोगों और उनके बच्चों तक ही सीमित रह गया है। गरीबों और निचले तबके तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए आरक्षण में कोटा के भीतर कोटा (सब-क्लासिफिकेशन) लागू किया जाना चाहिए।
- डॉ. संतोष कुमार सुमन: आरक्षण को दलितों और वंचितों का हक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी समीक्षा की मांग करना या यह पूछना कि इसका लाभ वास्तव में कितनों को मिला, विरोध नहीं बल्कि सामाजिक न्याय की मांग है।
- दिलीप जायसवाल: उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण की समीक्षा का अर्थ इसे खत्म करना बिल्कुल नहीं है। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों अपनी जगह सही हैं, और जो लोग इसका लाभ लेते हैं यह मुद्दा उनके बीच का है, इसमें किसी तीसरे को पड़ने की जरूरत नहीं है।
- तेजस्वी यादव: उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में आरक्षण को खत्म करने वाला कोई पैदा नहीं हुआ है। उन्होंने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें दम है तो वे आरक्षित सीटों के बजाय सामान्य सीटों से चुनाव लड़कर दिखाएं, क्योंकि ये दोनों नेता भाजपा और आरएसएस के इशारे पर आरक्षण विरोधी एजेंडे को हवा दे रहे हैं।



