पटना। शहर स्थित इस्कॉन मंदिर में आगामी 29 जून को देव स्नान पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जाएगा। सनातन परंपरा और पुरी की प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का महास्नान संपन्न होगा। इस विशेष अनुष्ठान में गंगाजल से भरे 108 स्वर्ण कलशों से प्रभु का अभिषेक किया जाएगा। यह स्नान रथयात्रा महाउत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन भगवान जगन्नाथ का प्राकट्य दिवस भी मनाया जाता है।

​स्नान के बाद एकांतवास और उपचार

​पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में अत्यधिक जल से स्नान करने के कारण प्रभु जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं। स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान 14 दिनों के लिए एकांतवास में चले जाते हैं। इस दौरान प्रभु को परंपरागत छप्पन भोग नहीं लगाया जाता है। स्वास्थ्य लाभ के लिए उन्हें विशेष आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, फलों के रस और काढ़े का भोग अर्पित किया जाता है। इस अवधि में मंदिर के गर्भ गृह में मुख्य पुजारियों और विशेष सेवकों को छोड़कर अन्य किसी के प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध रहता है।

​नव-यौवन दर्शन और रथयात्रा

​14 दिनों के विश्राम और उपचार के बाद, 15 जुलाई को प्रभु पूर्णतः स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इस दिन नेत्रोत्सव और नव-यौवन दर्शन का आयोजन होगा। इसके अगले दिन यानी 16 जुलाई को पटना में भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इस्कॉन मंदिर द्वारा संचालित यह रथयात्रा शहर का मुख्य आकर्षण होगी।
​40 फीट ऊंचे विशेष हाइड्रोलिक सिस्टम से निर्मित रथ को आकर्षक फूलों और भव्य सजावट से सुसज्जित किया जाएगा। रथयात्रा मार्ग में भक्तों द्वारा पुष्पवर्षा और आरती के साथ प्रभु का स्वागत किया जाएगा। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस रथ की पावन रस्सी को खींचते हैं वे परम पुण्य के भागीदार बनते हैं। इस महाआयोजन में हिस्सा लेने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पटना पहुंचते हैं।