पटना। शहर में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति को लेकर प्रशासन और आंकड़ों के बीच रस्साकशी जारी है। एक ओर जिला प्रशासन आपूर्ति सामान्य होने का दावा कर रहा है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि राजधानी में गैस सिलेंडरों की पेंडेंसी का आंकड़ा 1.28 लाख के पार पहुंच गया है। पिछले पांच दिनों (26-30 अप्रैल 2026) के आंकड़ों ने व्यवस्था की पोल खोल दी है।
कंपनियों की स्थिति: IOCL पर सबसे ज्यादा दबाव
तेल कंपनियों द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सबसे खराब स्थिति इंडियन ऑयल (IOCL) की है, जहां 91,264 सिलेंडरों की डिलीवरी लंबित है। भारत पेट्रोलियम (BPCL) के 25,522 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के 12,094 मामले पेंडिंग हैं। मांग और आपूर्ति का असंतुलन इस कदर है कि प्रतिदिन होने वाली बुकिंग की तुलना में डिलीवरी कम हो रही है, जिससे बैकलॉग लगातार बढ़ रहा है।
आंकड़ों की जुबानी: क्यों गहराया संकट?
पटना जिले में कुल 16.65 लाख उपभोक्ता हैं, जिनके लिए महज 136 गैस एजेंसियां उपलब्ध हैं। 30 अप्रैल के आंकड़ों को देखें तो 30,935 नई बुकिंग के मुकाबले केवल 29,431 सिलेंडरों की ही डिलीवरी हो सकी। रोजाना का यह अंतर पेंडिंग मामलों की संख्या को बढ़ाता जा रहा है, जो अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
शिकायतों का अंबार और प्रशासनिक प्रयास
गैस किल्लत का असर जिला नियंत्रण कक्ष में भी दिख रहा है। अब तक कुल 4,088 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय किया है और कंपनियों के टोल-फ्री नंबर जारी किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि निगरानी तेज कर दी गई है, लेकिन उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या और सीमित संसाधनों के बीच संतुलन बिठाना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।
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