अजयारविंद नामदेव, शहडोल। जिले में भीषण गर्मी के साथ ही पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। बुढ़ार जनपद पंचायत के ग्राम मलया-2 में हालात बद्तर हो चुके हैं। यहां सरकार की ‘हर घर नल-जल’ योजना कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
भीषण गर्मी और 2 किलोमीटर का सफर
जिले में पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। इस झुलसा देने वाली गर्मी में गांव की महिलाएं और बुजुर्ग सिर पर बर्तन रखकर 2 किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के इंतजाम में ही उनका आधा दिन बीत जाता है, जिससे उनकी मजदूरी और अन्य काम प्रभावित होते हैं।
लाखों की पानी टंकी बनी दिखावा
आपको बता दें कि गांव में लाखों रूपए खर्च कर पानी की टंकी तो बना दी गई है लेकिन यह सिर्फ एक शो-पीस बनकर रह गया है। ठेकेदारों की लापरवाही के कारण पाइपलाइन पूरी तरह से नहीं बिछाया गया और न ही घरों तक कनेक्शन दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

प्रशासन का क्या है कहना?
जब इस मामले में बुढ़ार जनपद CEO राजीव लघाटे से हमारी टीम ने बात की तो उन्होंने सिर्फ यह जवाब दिया कि आपको माध्यम से यह मामला मेरे संज्ञान में आया है, इसे दिखवाते हैं।
ग्रामीणों में है नाराजगी
जहां एक तरफ सरकार जल जीवन मिशन के तहत हर घर पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं मलया-2 की यह तस्वीर उन दावों की पोल खोल रही है। ग्रामीणों में प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ रोष भरा हुआ है।


