Business Desk – Petrol Diesel Export Duty : केंद्र सरकार ने 16 जुलाई 2026 से पेट्रोल, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) पर लगने वाले निर्यात शुल्क (Export Duty) में बदलाव किया है. सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क घटाया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर टैक्स बढ़ा दिया है. नई दरें गुरुवार (16 जुलाई) से लागू हो गई हैं. सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार और कच्चे तेल की कीमतों को देखते हुए हर 15 दिन में इन दरों की समीक्षा करती है.

पेट्रोल पर टैक्स घटा, डीजल और ATF पर बढ़ा
सरकार की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 4 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं डीजल पर निर्यात शुल्क 8.5 रुपए से बढ़ाकर 15.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है. इसके अलावा विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) पर भी शुल्क 7.5 रुपए से बढ़ाकर 14.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है.
कच्चे तेल में लगातार तेजी
सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है. गुरुवार (16 जुलाई) सुबह करीब 6:35 बजे WTI क्रूड 80.130 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 85.385 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
क्यों बढ़ रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है. ईरान द्वारा तेल टैंकरों पर हमलों के बाद अमेरिका ने भी ईरान पर कार्रवाई शुरू की है. दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और नाकाबंदी की स्थिति का असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है. इसके अलावा ईरान पहले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी दे चुका है, जबकि अमेरिका लगातार ईरान पर बड़े हमलों की चेतावनी दे रहा है. इन घटनाक्रमों से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग माना जाता है. दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव या सप्लाई बाधित होने का असर पूरी दुनिया के ईंधन बाजार पर पड़ सकता है. रूस से निर्यात में कमी के बीच होर्मुज क्षेत्र में बढ़ता तनाव सप्लाई संकट को और गहरा कर सकता है.
सरकार पहले भी उठा चुकी है कदम
सरकार ने 11 जून को कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और इंस्टीट्यूशनल उपभोक्ताओं के लिए रिटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर रोक लगा दी थी. इन उपभोक्ताओं को केवल थोक आपूर्ति (Bulk Supply) के जरिए ईंधन खरीदने की अनुमति दी गई थी, ताकि आम लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता प्रभावित न हो.
हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद सरकार ने 1 जुलाई को यह प्रतिबंध हटा लिया था. लेकिन अब अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव को देखते हुए वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है.

