कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश की सहकारी शुगर मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और गन्ना किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुगर मिलों की उत्पादन लागत कम करने, चीनी की रिकवरी बढ़ाने, अनावश्यक स्टॉपेज घटाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री शनिवार को हरियाणा निवास में हरियाणा स्टेट फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर मिल्स की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मिलों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को बेहतर सुविधाएं देना सरकार की प्राथमिकता है।

मिलों में स्टॉपेज कम करने पर खास जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शुगर मिलों में अनावश्यक स्टॉपेज को न्यूनतम रखा जाए। मशीनरी की समय पर मेंटेनेंस और जरूरी स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाए, ताकि गन्ना पेराई के सीजन में मिलों का संचालन प्रभावित न हो।

उन्होंने मिलों के प्रबंध निदेशकों से पिछले सीजन में हुई स्टॉपेज के घंटों की जानकारी भी ली। स्टोर मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर की सराहना करते हुए सभी सहकारी शुगर मिलों में इसके अनिवार्य इस्तेमाल के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी मिल में आवश्यक स्पेयर पार्ट उपलब्ध नहीं है, लेकिन वह दूसरी मिल के स्टोर में मौजूद है तो दोनों मिलों के प्रबंध निदेशक आपसी समन्वय से उसका इस्तेमाल करें। इससे नई खरीद में लगने वाला समय और पैसा बचेगा तथा मिलों का स्टॉपेज भी कम होगा।

किसानों से हर चार महीने में होगा सीधा संवाद

किसानों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए सभी गन्ना तुलाई केंद्रों पर सुझाव पेटियां लगाने के निर्देश दिए गए हैं। किसान इन पेटियों के माध्यम से अपनी समस्याएं और सुझाव दे सकेंगे। अधिकारियों को इन सुझाव पेटियों को नियमित रूप से चेक करने और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई करने को कहा गया है।

इसके अलावा सभी सहकारी शुगर मिलों के प्रबंध निदेशकों को हर चार महीने में किसानों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन बैठकों में किसानों की समस्याओं और सुझावों पर सीधे चर्चा होगी तथा उपयोगी सुझावों को मिलों की कार्यप्रणाली में शामिल किया जाएगा।

4 फीट दूरी पर गन्ना बिजाई को मिलेगा बढ़ावा

गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन के तहत 4 फीट की दूरी पर चौड़ी कतारों में गन्ना बिजाई करने वाले किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ा दी गई है। अब किसानों को ₹3 हजार की बजाय ₹5 हजार प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। सरकार का मानना है कि बेहतर तकनीक और चौड़ी कतारों में गन्ना बिजाई से उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी और इसका फायदा शुगर मिलों की रिकवरी पर भी पड़ेगा।

नई गन्ना किस्मों पर जोर, चार टिशू कल्चर लैब होंगी स्थापित

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भारत सरकार द्वारा स्वीकृत नई और अधिक उत्पादन देने वाली गन्ने की किस्मों को हरियाणा में जल्द अपनाने के निर्देश दिए। किसी अच्छी किस्म के बीज की उपलब्धता कम होने पर दूसरे राज्यों से भी इसकी व्यवस्था करने को कहा गया।

किसानों को उन्नत और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध करवाने के लिए रोहतक, महम, पानीपत और पलवल-करनाल शुगर मिलों में चार टिशू कल्चर लैब स्थापित की जाएंगी। इससे गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने के साथ शुगर मिलों की रिकवरी में सुधार की उम्मीद है।

कैथल में हार्वेस्टिंग मशीनों का पायलट प्रोजेक्ट

गन्ने की कटाई के लिए श्रमिकों की कमी की समस्या को देखते हुए कैथल शुगर मिल में हार्वेस्टिंग मशीनों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। मशीनों से किसानों के खेतों में गन्ने की कटाई कर उसे सीधे शुगर मिल तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।

यदि पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम बेहतर रहे तो इस व्यवस्था को प्रदेश की अन्य शुगर मिलों में भी लागू करने पर विचार किया जाएगा।

सोनीपत की पुरानी शुगर मिल होगी शिफ्ट

मुख्यमंत्री ने सोनीपत की पुरानी शुगर मिल को वर्तमान स्थान से किसी उपयुक्त स्थान पर शिफ्ट करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। नई मिल स्थापित होने तक मौजूदा मिल की मशीनरी और अन्य व्यवस्थाओं का उचित रखरखाव सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मिलों की आय बढ़ाने के लिए नए विकल्प तलाशने के निर्देश

सरकार शुगर मिलों की आय बढ़ाने के लिए चीनी के अलावा बिजली और एथेनॉल उत्पादन पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने ऑफ सीजन में भी मिलों से बिजली उत्पादन जारी रखने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं।

मिलों की क्षमता बढ़ाने और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने पर भी जोर दिया गया। मिलों में तैयार गुड़ को हरित एवं वीटा स्टोर के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने पर चर्चा हुई। वहीं, करनाल और रोहतक शुगर मिलों द्वारा एक किलोग्राम पैकिंग में रिफाइंड चीनी उपलब्ध करवाने की जानकारी दी गई।

रोहतक मिल की चीनी का फार्मास्यूटिकल कंपनियां कर सकेंगी इस्तेमाल

हरियाणा राज्य सहकारी चीनी मिल संघ के प्रबंध निदेशक कैप्टन शक्ति सिंह ने बताया कि रोहतक शुगर मिल की चीनी की गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार काम किया जा रहा है। निर्धारित गुणवत्ता हासिल होने के बाद इस चीनी का इस्तेमाल फार्मास्यूटिकल कंपनियों द्वारा सिरप निर्माण में किया जा सकेगा।

प्रदेश में पानीपत, रोहतक, करनाल, शाहाबाद, गोहाना, सोनीपत, जींद, पलवल, महम और कैथल सहित कुल 10 सहकारी शुगर मिलें हैं। इनकी कुल पेराई क्षमता 30,650 टीसीडी है। इन मिलों में चीनी के साथ बिजली और एथेनॉल का भी उत्पादन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सहकारी शुगर मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और साथ ही गन्ना किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन, लागत में कमी और किसानों के साथ निरंतर संवाद को आधार बनाया जाएगा।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m