PM-CM Disqualification Bill: पीएम-सीएम और मंत्रियों को हटाने वाला 3 बिल मानसून सत्र में दोबारा संसंद में पेश हो सकता है। केंद्र सरकार इसी मानसून सत्र में ‘PM/CM को हटाने वाला बिल’ ला सकती है। सूत्रों के मुताबिक विवादित 130वें संविधान संशोधन बिल (130th Constitutional Amendment Bill) की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी (JPC) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दे सकती है। इस बिल का मकसद गंभीर अपराधों के लिए लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखे गए मंत्रियों और पीएम/सीएम को पद से हटाना है।
गृहमंत्री अमित शाह ने इससे जुड़े 3 बिलों को पिछले मानसून सत्र में संसद के दोनों सदनों में रखा था, जिसके बाद इसे इन्हें JPC को भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया था। 130वें संविधान संशोधन बिल के मुताबिक अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्य मंत्री किसी गंभीर अपराध के मामले में गिरफ्तार होने के बाद लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उन्हें पद छोड़ना होगा।
ओडिशा से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति इस विधेयक की जांच कर रही है और उम्मीद है कि यह समिति 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट अपना लेगी। इसके बाद, 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में इसे चर्चा और पारित करने के लिए लाया जा सकता है। जबकि कांग्रेस सहित ‘इंडिया’ गठबंधन के अधिकांश सदस्यों ने इस कार्यवाही का बहिष्कार किया था। उनका तर्क था कि इसमें शामिल होने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि सत्ताधारी पार्टी विपक्ष की चिंताओं को नजरअंदाज कर देगी और बिल को मंजूरी दिलाने के लिए समिति का इस्तेमाल केवल एक ‘रबर स्टैम्प’ के तौर पर करेगी।
स्वतः चली जाएगी कुर्सी
130वें संविधान संशोधन विधेयक, 2025 के प्रावधानों के अनुसार, अगर कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री किसी ऐसे अपराध का आरोपी है जिसमें 5 साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है और वह 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा। यह निष्कासन या तो राष्ट्रपति/राज्यपाल के निर्देश पर होगा या फिर हिरासत के 31वें दिन अपने आप स्वत: (automatically) प्रभावी हो जाएगा।

विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्ष के कई दलों ने इस समिति से दूरी बना ली है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि ये विधेयक कानून के उस बुनियादी सिद्धांत के खिलाफ हैं, जिसमें किसी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक उसका दोष साबित न हो जाए। विपक्ष का तर्क है कि यह कानून प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करता है क्योंकि इसमें जन प्रतिनिधियों को दोषी ठहराए जाने के बजाय केवल हिरासत में रखे जाने के आधार पर दंडित किया जाता है।
20 जुलाई से शुरू होने वाला मानसून सत्र
मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। रिपोर्ट मंज़ूर होने के बाद, केंद्र सरकार बिल को केंद्रीय कैबिनेट के सामने मंज़ूरी के लिए रखने से पहले पैनल की सिफारिशों पर विचार करेगी। इसके बाद इसे संसद के सत्र में विचार और पास कराने के लिए पेश किया जाएगा।

दोनों सदनों में नंबर गेम के समझे
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसद नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए, जो NDA का समर्थन कर रहा है। इसके अलावा उद्धव ठाकरे की शिवसेना के 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। इससे लोकसभा में NDA की ताकत बढ़ गई है और उसकी संख्या बढ़कर 330 हो गई है। हालांकि यह अभी भी संविधान संशोधन बिल को पास करने के लिए जरूरी दो-तिहाई संख्या बल (362) से 32 कम है। जबकि राज्यसभा में भी NDA की स्थिति बेहतर हुई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसद BJP में शामिल हो गए हैं, जिससे 242 सदस्यों वाले सदन में NDA की संख्या 141 हो गई है। 10 नॉमिनेटेड और निर्दलीय सदस्यों के समर्थन से गठबंधन की पक्की संख्या 151 हो जाती है, यह साधारण बहुमत से तो काफी ज़्यादा है। हालांकि इसके बावजूद संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से अभी भी 11 वोट कम है।
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