अभिषेक सेमर, तखतपुर। क्षेत्र में पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने में हो रही भारी देरी के कारण मर्ग प्रकरणों की विवेचना प्रभावित हो रही है। हालत यह है कि अलग-अलग घटनाओं से जुड़े लगभग 11 मर्ग मामलों की पीएम रिपोर्ट अब तक लंबित है, जिससे मृतकों के परिजनों को न्याय और राहत राशि पाने के लिए थाने और अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार कई मामलों में महीनों बीत जाने के बाद भी पीएम रिपोर्ट संबंधित थाने तक नहीं पहुंच पाई है। एक मामले में तो अक्टूबर में हुए मर्ग की पोस्टमार्टम रिपोर्ट करीब सात महीने बाद थाने में जमा की गई। ऐसे में पुलिस विवेचना लंबित पड़ रही है और शासन द्वारा मिलने वाली राहत मुआवजा राशि की प्रक्रिया भी अटक रही है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


हाल ही में ढाई वर्षीय बच्ची की इलाज में कथित लापरवाही से हुई मौत के मामले में भी पीएम रिपोर्ट अब तक नहीं मिल पाई है। वहीं राइस मिल में लोहे की चादर की प्लेट के नीचे दबकर हुई मजदूर की मौत के ताजा मामले में भी रिपोर्ट लंबित बताई जा रही है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट किसी भी मर्ग प्रकरण की जांच में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। रिपोर्ट के आधार पर ही मौत के कारणों का खुलासा होता है और आगे की कानूनी कार्रवाई तय होती है, लेकिन रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने से न सिर्फ जांच प्रभावित हो रही है, बल्कि पीड़ित परिवारों को भी न्याय मिलने में देरी हो रही है।
इतने मामलों में लंबित है पीएम रिपोर्ट
तानिया वर्मा — मार्ग नं. 04
दिलहरन वैष्णव, बघेलकापा — मर्ग क्रमांक 31
दिलीप साहू, नगोई — मर्ग क्रमांक 32
मेलुदास, लमकेना — मार्ग क्रमांक 34
सुशीला बाई घोड़मार — मर्ग क्रमांक 35
हरीश प्रजापति, खपरी — मर्ग क्रमांक 36
दीपक ध्रुव, चोरमा — मर्ग क्रमांक 37
धनसाय साहू, सिलतरा — मर्ग क्रमांक 24
महेन्द्र कुमार कश्यप, केकटी — मर्ग क्रमांक 25
राकेश केवट, खपरी — मर्ग क्रमांक. 26
रविशंकर लहरें, गुनसरी — मर्ग क्रमांक. 27
कमलेश पटेल, भकुर्रा नवापारा — मर्ग क्रमांक . 28
हरिशंकर वैष्णव, महासमुंद — मर्ग क्रमांक 30
तांसी पटेल, भकुर्रा — मर्ग क्रमांक 88/25 अक्टूबर 25
पीएम रिपोर्ट के बिना विवेचना प्रभावित होती है : थाना प्रभारी
इस मामले में तखतपुर थाना प्रभारी विवेक पांडेय ने बताया कि क्षेत्र के लगभग 11 मर्ग मामलों की पीएम रिपोर्ट लंबित है। किसी भी मर्ग केस में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रिपोर्ट के आधार पर ही विवेचना आगे बढ़ती है। यदि रिपोर्ट देर से मिलती है तो जांच भी प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार एक सप्ताह के भीतर पीएम रिपोर्ट उपलब्ध हो जानी चाहिए, इसलिए समय-समय पर रिपोर्ट की मांग की जाती है ताकि जांच में तेजी लाई जा सके और परिजनों को उचित न्याय मिल सके।
पीएम रिपेार्ट में देरी पर डॉक्टरों को जारी होगा नोटिस : डॉ. उमेश
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमेश साहू ने कहा कि नियमानुसार पीएम रिपोर्ट समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य है। हालांकि कुछ संवेदनशील मामलों में विशेषज्ञ टीम गठित कर पोस्टमार्टम किया जाता है, जिससे रिपोर्ट तैयार होने में थोड़ा समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी डॉक्टर द्वारा अनावश्यक देरी की गई होगी तो संबंधित को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
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