Bihar news: पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में लगभग ढाई महीने पहले करोड़ों रुपए की लागत से अत्याधुनिक सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें स्थापित की गई थीं। इसके बावजूद मरीजों को इन महत्वपूर्ण जांचों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की भारी कमी है, जिसके चलते अस्पताल का रेडियोलॉजी विभाग पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहा है।
​गंभीर मरीजों की बढ़ी मुश्किलें और निजी सेंटरों की मजबूरी
​नतीजतन, सड़क दुर्घटनाओं के शिकार मरीजों, ब्रेन स्ट्रोक, सिर की गंभीर चोटों, रीढ़ की बीमारियों और अन्य न्यूरोलॉजिकल रोगों से पीड़ित लोगों को इन जांचों के लिए या तो महंगे निजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है या फिर अन्य अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि अस्पताल के नए रेडियोलॉजी भवन में जून माह में ही विभाग का संचालन शुरू हो गया था, जहां एक्स-रे और अन्य सामान्य जांचें तो मिल रही हैं, लेकिन सीटी स्कैन और एमआरआई सेवाएं पूरी तरह ठप हैं।

​कम वेतनमान के कारण नहीं मिल रहे योग्य तकनीशियन

​अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पीएमसीएच और राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रेडियोलॉजी तकनीशियनों की नियुक्ति संविदा के आधार पर की जाती है। इन पदों के लिए 18,000 से 20,000 रुपए प्रतिमाह वेतन का प्रावधान है। इसके विपरीत, निजी अस्पतालों और एम्स पटना में संविदा पर कार्यरत सीटी स्कैन व एमआरआई तकनीशियनों को 30,000 से 35,000 रुपए प्रति माह तक दिए जाते हैं। कम वेतन मिलने के कारण योग्य तकनीशियन सरकारी अस्पतालों में कार्य करने के इच्छुक नहीं हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए अब यह मामला पीएमसीएच की ‘रोगी कल्याण समिति’ को सौंप दिया गया है, जिसकी बैठक में उचित वेतनमान तय किए जाने की उम्मीद है।

​तीन शिफ्ट संचालन के लिए आवश्यक मानव संसाधन और योग्यता

​एक सीटी स्कैन और एमआरआई यूनिट को लगातार तीन शिफ्टों में सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 30 से 32 तकनीकी कर्मियों की आवश्यकता होती है। इस टीम में एमआरआई व सीटी स्कैन तकनीशियन, रेडियोग्राफर, सहायक कर्मचारी और डेटा प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल होते हैं। इन पदों के लिए बीएससी मेडिकल इमेजिंग टेक्नोलॉजी, बीएससी रेडियोग्राफी, डीएमआरटी या समकक्ष डिग्री/डिपार्टमेंटल डिप्लोमा अनिवार्य होता है। एमआरआई तकनीशियनों को मैग्नेटिक फील्ड सुरक्षा, मरीज की स्क्रीनिंग और जटिल मशीन संचालन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त होना चाहिए, जबकि सीटी स्कैन के लिए रेडिएशन सुरक्षा और कंट्रास्ट प्रोटोकॉल का ज्ञान जरूरी है।

​15 अगस्त से पहले सेवाएं शुरू होने की उम्मीद

​अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि तकनीकी कर्मियों के वेतन निर्धारण का मामला रोगी कल्याण समिति के विचाराधीन है। आगामी सप्ताह तक वेतनमान तय होते ही त्वरित गति से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो पूरी संभावना है कि 15 अगस्त से पहले पीएमसीएच में मरीजों को सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा मिलने लगेगी।