पटना। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने और मरीजों को सुलभ इलाज मुहैया कराने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) को लेकर कई सख्त और अहम फैसले लिए हैं। अस्पताल की कार्यशैली में सुधार और प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को पीएमसीएच परिसर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, विशेष सचिव अरविंद वर्मा और बीएमएसआइसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत सेन ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

​डॉक्टरों के लिए समय सीमा और उपस्थिति हुई अनिवार्य

​अब पीएमसीएच के सभी डॉक्टरों को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के तय मानकों के अनुसार प्रतिदिन सुबह 9 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक अस्पताल में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा। निरीक्षण के दौरान आपातकालीन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि जिन यूनिटों में इमरजेंसी वार्ड चल रहे हैं, वहां तैनात डॉक्टरों को हर दिन कम से कम दो बार मरीजों का राउंड लेना होगा और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की बारीकी से जांच करनी होगी। इससे गंभीर रूप से बीमार मरीजों का समय पर और बेहतर उपचार सुनिश्चित हो सकेगा।

​रिक्त पदों को भरने की कवायद और निर्माण कार्यों की समीक्षा

​अस्पताल में डॉक्टरों की मौजूदा कमी को जल्द से जल्द दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है। स्वास्थ्य सचिव ने अस्पताल के अधीक्षक से चर्चा कर सभी खाली पड़े पदों की सूची (अधियाचना) तुरंत विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, अधिकारियों ने नए ओपीडी भवन, पंजीकरण काउंटर और दवा वितरण केंद्र के निर्माण कार्यों की प्रगति का भी निरीक्षण किया। निर्माण एजेंसी एलएंडटी और बीएमएसआइसीएल के प्रतिनिधियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों, उच्च गुणवत्ता और तय समय-सीमा का सौ फीसदी पालन होना चाहिए।

​आयुष्मान योजना का विस्तार और अमृत फार्मा से बेहतर तालमेल

​बैठक में आयुष्मान भारत योजना के प्रभारी सह विशेष सचिव अरविंद वर्मा ने निर्देश दिया कि योजना का लाभ मरीजों तक सुगमता से पहुंचाने के लिए अस्पताल में जल्द ही कुशल आयुष्मान मित्रों की तैनाती की जाएगी, जो जरूरतमंदों की सहायता करेंगे। डॉक्टरों और अन्य कर्मियों को इस योजना के तकनीकी पहलुओं से पूरी तरह अवगत कराने के लिए विशेष कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा, अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने और किसी भी प्रकार की बाधा को तुरंत दूर करने के लिए अमृत फार्मा के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है ताकि मरीजों को मुफ्त और समय पर दवाएं मिल सकें।