POK Protest Video: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके (PoK-Pakistan Occupied Kashmir) में पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) और सुरक्षाबलों ने खूनी खेल खेला है। हक मांग रहे कश्मीरियों को पाकिस्तानी सेना ने गोलियों से भून दिया। हमले में 27 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। पाकिस्तान सेना ने यह खूनी खेल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के शहर रावलकोट (Rawalakot) में खेला। यह खूनी खेल उस खेला गया है, जब एक दिन पहले ही 7 जून को पाकिस्तान ने कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान में स्थानीय चुनाव कराए गए हैं।

घटना के बाद से पूरे पीओके में तनाव चरम पर है। पूरे क्षेत्र में 9 जून यानी आज बंद का आह्वान किया गया है। प्रदर्शन से निपटने के लिए पाक सरकार 14 हजार सैनिकों की फौज पाक अधिकृत कश्मीर में भेज रही है। जबकि 5 जून से पूरे पीओके में इंटरनेट बंद है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोग पाकिस्तान की सरकार और सेना के खिलाफ महंगाई, रिफ्यूजी सीट बर्खास्त करने और वादखिलाफी करने समेत 38 मांगों को लेकर स्थानीय संगठन जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। यह संगठन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बदहाली के लिए वहां की सेना को जिम्मेदार ठहराता है। अपनी 38 मांगों को लेकर काफी समय से आंदोलन कर रहा है। वहीं पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए संगठन को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। इसके बाद आजाद जम्मू कश्मीर पुलिस ने JAAC के हेड ऑफिस को सील कर दिया है, और बाकी शहरों और कस्बे में मौजूद इस संगठन के ऑफिस पर छापेमारी कर रही है।

इस तरह बवाल की हुई शुरुआत

बवाल शुक्रवार की रात शुरू तब हुआ जब रावलकोट में पुलिस फायरिंग में प्रदर्शनकारी कारोबारी शाहजेब हबीब  की मौत हो गई। उसका शव रावलकोट के मिलिट्री हॉस्पिटल में पोस्टमॉर्टम के लिए लाया गया, लेकिन रविवार तक पोस्टमॉर्टम नहीं किय़ा गया। इससे नाराज शहरी अस्पताल में ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े। उसके बाद तो हालात बेकाबू हो गए। गुस्साई भीड़ ने पुलिस वालों और पैरा-मिलिट्री को दौड़ा-दौड़ाकर मारा, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गी। उधर, मृत कारोबारी के परिजनों ने शव दफनाने से ये कहते हुए इनकार कर दिया है कि सरकार जब तक JAAC पर लगे प्रतिबंध को हटाने का नोटिस जारी नहीं करती और बाकी मांगे नहीं मानती, न तो शव दफनाया जाएगा और न धरना प्रदर्शन बंद होगा।

इधर शाहजेब की अंतिम संस्कार की प्रार्थना के लिए लोग जुटे थे। इसमें अवामी ऐक्शन कमेटी के नेता भी शामिल थे। इस दौरान लोग पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, तभी सुरक्षाबलों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। स्थानीय मीडिया के मुताबिक पाकिस्तानी सेना और सुरक्षाबलों के खूनी खेल में 27 लोगों की मौत हो गई। जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय निवासियों और JAAC समर्थकों ने सरकारी दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नागरिकों की मौत और घायलों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से अधिक हो सकती है।

बवाल होने का एक ये भी कारण

दरअसल POK में ताजा आंदोलन की सबसे बड़ी वजह वहां की विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों को लेकर लिया गया फैसला भी है। 45 सदस्यीय विधानसभा में ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं जो कश्मीर से जुड़े होने का दावा करते हैं, लेकिन वर्तमान में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं। JAAC और अन्य स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था से स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होगा और बाहरी प्रभाव बढ़ेगा। इसी मांग को लेकर संगठन लंबे समय से आंदोलन चला रहा है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

इस पूरे घटनाक्रम पर पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने कहा कि वह रावलकोट में हुई हिंसा और JAAC पर लगाए गए  प्रतिबंध से बेहद चिंतित है। आयोग ने सवाल उठाया कि एक राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित करना कितना सही है।

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