शिखिल ब्यौहार, भोपाल। राजधानी भोपाल के मिसरोज थाना पुलिस द्वारा चाय-समोसे बेचने वाले, ढाबा संचालक, मजदूर और अन्य मामलों में गवाह बनाने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा पुलिस के ही क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग एंड नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) से हुआ है। सीसीटीएनएस के मुताबिक, थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार के ज्वाइन करने की तारीख 2 दिसंबर 2025 से 16 अप्रैल 2026 तक महज चार महीने में कुल 146 मामले दर्ज किए गए। यह जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आरटीआई द्वारा मांगी गई जानकारी में सामने आई है।

मजदूर 12 मामलों में गवाह बना

इनमें 109 मामले सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने, 15 मामले दोपहिया वाहन चोरी, 14 मामले घरों में चोरी और 8 मामले अवैध शराब बेचने से संबंधित हैं। दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच दर्ज 103 एफआईआर के विश्लेषण में सामने आया कि थाने का ड्राइवर सुरेश अहिरवार, जो रात में थाने की गाड़ी चलाता है, उसे 22 मामलों में गवाह बनाया गया। वहीं ढाबा संचालक विष्णु पाटिल उर्फ देवा पाटिल को 36 मामलों में गवाह बनाया गया। मजदूर राघवेंद्र मैना 12 मामलों में गवाह बना, जबकि थाने के पास चाय-समोसे की दुकान चलाने वाले धर्मेंद्र कुशवाहा को तीन अलग-अलग मामलों में गवाह बनाया गया।

28 मामलों में पुलिसकर्मी खुद ही गवाह बने

हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों को पहले सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने के आरोप में पकड़ा गया, उन्हें बाद में दूसरे मामलों में गवाह बना दिया गया। वहीं 28 मामलों में पुलिसकर्मी खुद ही गवाह बन गए। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि थाना प्रभारी परिहार के आने के बाद सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने के 109 मामले तेजी से दर्ज किए गए। हालांकि अगले महीनों जनवरी और फरवरी में ऐसे मामलों की संख्या कम हो गई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना बंद कर दिया या फिर पुलिस ने कार्रवाई करना कम कर दिया।

आरोपी और गवाह की अदला-बदली

13 दिसंबर 2025 को अपराध क्रमांक 606 में भगवान दास पिता मिश्रिलाल अहिरवार, निवासी मंडीदीप को गवाह बनाया गया। बाद में उसी दिन अपराध क्रमांक 608 में उसे आरोपी बना दिया गया। इसी तरह दिलीप कुमार पिता अनार सिंह, जिसे अपराध क्रमांक 607 में आरोपी बनाया गया था, उसे बाद में गवाह बना दिया गया। इसी प्रकार 15 दिसंबर 2025 को अपराध क्रमांक 614 में सतीश शर्मा पिता किशन शर्मा निवासी बरेली, रायसेन को आरोपी बनाया गया और संतोष मोरे पिता सीताराम मोरे निवासी बाबई, नर्मदापुरम को गवाह बनाया गया। बाद में उसी दिन अपराध क्रमांक 615 में संतोष मोरे को आरोपी और सतीश शर्मा को गवाह बना दिया गया।

ढाबा संचालक को 36 जगह बनाया गवाह

विष्णु पाटिल उर्फ देवा पाटिल पिता राम पाटिल निवासी मल्टी नंबर-3, इंद्रा नगर, जाटखेड़ी, मिसरोद थाना क्षेत्र के 11 मील पर देवराज ढाबा का संचालन करता है। मिसरोद पुलिस ने उसे 36 मामलों में गवाह बनाया है। एफआईआर के विश्लेषण में सामने आया कि जहां-जहां अपराध हुआ, वहां-वहां यह गवाह पुलिस को मिल गया।

पुलिस का ड्राइवर बना 22 जगह गवाह

सुरेश अहिरवार पिता मुन्नालाल, ग्राम मक्सी, 11 मील बायपास का रहने वाला है। वह सुबह मिसरोद थाने में पेड़-पौधों को पानी देता है और रात में पुलिस की बोलेरो गाड़ी चलाता है। यानी वह थाने का ड्राइवर है। उसे 22 मामलों में गवाह बनाया गया। एक ही दिन में अलग-अलग एफआईआर में 10 मामलों में उसकी गवाही दर्ज की गई, जबकि एक महीने में कुल 15 एफआईआर में वह गवाह बना।

मिसरोद पुलिस खुद 28 जगह गवाह बनी

मिसरोद पुलिस ने अपने आरक्षक, प्रधान आरक्षक, सहायक उपनिरीक्षक और उपनिरीक्षक स्तर के कर्मचारियों को 28 मामलों में गवाह बना दिया। सवाल यह उठ रहा है कि क्या पुलिस को स्वतंत्र गवाह नहीं मिले या फिर पुलिसकर्मी ही गवाही देने के लिए आगे आए।

चाय-समोसे बेचने वाला भी बना गवाह

राघवेंद्र मैना पिता स्वर्गीय उदेश मैना, मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित एक्सल स्टेट की झुग्गी में रहता है और मजदूरी करता है। उसे 12 मामलों में गवाह बनाया गया है। धर्मेंद्र कुशवाह पिता जीतमल कुशवाह, मिसरोद पुराने गांव का रहने वाला है। उसकी थाने के पास शासकीय स्कूल के गेट पर चाय-समोसे की दुकान है। उसे भी विष्णु पाटिल के साथ एक ही दिन में तीन अलग-अलग मामलों में अलग-अलग समय पर गवाह बनाया गया। दुर्गेश गिरी पिता राकेश गिरी और राहुल अहिरवार पिता बृजेश अहिरवार, दोनों अरेरा हिल्स स्थित भीमनगर की झुग्गी के रहने वाले हैं और मजदूरी करते हैं। इन्हें भी एक ही दिन में अलग-अलग समय पर चार अलग-अलग अपराधों में मिसरोद पुलिस ने गवाह बनाया।

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