इमरान खान, खंडवा। भारतीय जनता पार्टी के जन आक्रोश महिला सम्मेलन और पदयात्रा पर सियासी बवाल खड़ा हो गया है। महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर भाजपा ने सम्मेलन का आयोजन किया गया था लेकिन एक व्हाटसएप मैसेज ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। वायरल हो रहे इस मैसेज में सरकारी ग्रुप के जरिए 200 महिलाओं को काली साड़ी में भाजपा कार्यालय पहुंचाने के निर्देश दिए गए थे। वहीं इस वाक्ये के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
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बता दें कि भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा के नेतृत्व में रैली और पदयात्रा का आयोजन किया गया। लेकिन एक वायरल मैसेज ने इस रैली को विवादों में ला खड़ा किया। DPO रत्ना शर्मा के नाम से विभागीय ग्रुप में डाले गए मैसेज में निर्देश दिए गए हैं कि 3 बजे भाजपा कार्यालय में 200 महिलाओं को काली साड़ी में पहुंचाया जाए। मैसेज में सुपरवाइजर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को महिलाओं की सूची तैयार करने और संख्या जुटाने की जिम्मेदारी भी दी गई। हालांकि मैसेज के वायरल होने और सवाल उठने पर आयोजन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल नहीं हुईं। लेकिन पूरा मामला राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा गया है।
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इस मैसेज के सामने आने के बाद पक्ष-विपक्ष में बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा को भीड़ जुटाने के लिए सरकारी कर्मचारियों का सहारा लेना पड़ रहा है। ये उनकी हकीकत दिखाता है। दूसरी तरफ विधायक कंचन तनवे ने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के खिलाफ है, बहनों को कार्यक्रम में आने से रोका गया है। अगर महिलाएं आतीं तो कांग्रेस को दिक्कत क्यों होती है?
फिलहाल भारतीय जनता पार्टी की रैली और इस मैसेज का वायरल होना है बहस का विषय बन गया है। ऐसे में सवाल यही है कि वायरल चैट का सच क्या है? अगर यह बात सही है तो क्या सरकारी तंत्र का इस्तेमान राजनीतिक कार्यक्रम के लिए किया जा रहा है या फिर यह सिर्फ एक भ्रामक मैसेज है।

