शब्बीर अहमद, भोपाल। एमपी कांग्रेस में अनुशासन और गुटबाजी को लेकर शुरू हुआ सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर और मुखर हो गए हैं। कांग्रेस महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष प्रियंका करार और किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुरेश पटेल धाकड़ ने नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पार्टी में कार्यकर्ताओं के साथ भेदभाव किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
सौदेबाज नेताओं के खिलाफ बोलती रहूंगी
नोटिस मिलने के बाद प्रियंका करार ने सोशल मीडिया पर एक बेहद तीखी पोस्ट साझा की है। उन्होंने खुद को पार्टी का ईमानदार सिपाही बताते हुए बड़े नेताओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रियंका करार ने लिखा- “मैं पार्टी की ईमानदार कार्यकर्ता हूँ और पार्टी के सौदेबाज नेताओं के खिलाफ हमेशा बोलती रहूंगी। मेरे नेता राहुल गांधी जी ने कहा है कि ‘सच बोलो, डरो मत’, तो क्या अब कांग्रेस में सच बोलने वालों को नोटिस रूपी सजा दी जाएगी?”
दिग्विजय, सज्जन और आरिफ मसूद को नोटिस क्यों नहीं?
प्रियंका ने सवाल उठाया कि आखिर कार्रवाई की गाज सिर्फ महिलाओं पर ही क्यों गिरती है? अगर नियम सबके लिए समान हैं, तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ बोलने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, और दिग्विजय सिंह के खिलाफ खुलकर बयानबाजी करने वाले पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा तथा विधायक आरिफ मसूद को नोटिस क्यों नहीं दिया गया?
जिला अध्यक्ष पर गंभीर आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी गाइडलाइन का उल्लंघन कर टीवी डिबेट में बैठने वाले जिला अध्यक्ष पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। क्या पीसीसी यह संदेश देना चाहती है कि वह जिला अध्यक्षों को महिला और जिम्मेदार पद पर बैठी पदाधिकारी का अपमान करने की खुली छूट देगी?
बीजेपी से ‘कंप्रोमाइज’ वालों को पुरस्कार
प्रियंका ने आरोप लगाया कि जो नेता पार्टी में रहकर नुकसान पहुंचा रहे हैं, बीजेपी से कंप्रोमाइज (साठगांठ) कर रहे हैं और जिलों में गुटबाजी फैला रहे हैं, उन्हें पुरस्कृत किया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि वह इस नोटिस का जवाब तथ्यों के साथ देंगी।
किसान कांग्रेस नेता सुरेश पटेल धाकड़ ने भी बोला हमला
इसी मामले को लेकर राजनीतिक घमासान तब और बढ़ गया जब किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुरेश पटेल धाकड़ भी कार्यकर्ताओं के समर्थन में उतर आए। उन्होंने भी पार्टी नेतृत्व द्वारा की जा रही कार्रवाई में भेदभाव बरतने का आरोप लगाया।
“क्या नियम सिर्फ कार्यकर्ताओं के लिए हैं?” सुरेश पटेल धाकड़ ने नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि आज के दौर में सही को सही और गलत को गलत कहना भी गुनाह हो गया है। उन्होंने सवाल दागा कि- “अगर नियम बनाए गए हैं तो वो जितने कार्यकर्ताओं पर लागू होते हैं, उतने ही नेताओं पर भी होने चाहिए। क्या इस प्रकार का नोटिस उन बड़े नेताओं को भी जारी किया जाएगा जो दिन-रात गुटबाजी में लिप्त हैं, या फिर यह हंटर सिर्फ छोटे कार्यकर्ताओं पर ही चलेगा? जब भी कुछ गलत होता है, तो गाज हमेशा कार्यकर्ता पर ही क्यों गिरती है, नेताओं पर क्यों नहीं?”
पार्टी में अंदरूनी कलह गहराने के संकेत
एक साथ दो प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों द्वारा अनुशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाने से मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) बैकफुट पर नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस उठापटक से आने वाले दिनों में संगठन के भीतर गुटबाजी और अंदरूनी कलह और ज्यादा गहरा सकती है।

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