राकेश चतुर्वेदी की कलम से

गए थे शराब दुकान बंद कराने लेकिन फैल गया रायता….

भोपाल में सीलिंग को लेकर विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है एक तरफ व्यापारी है तो दूसरी तरफ रहवासी मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है लेकिन यह लड़ाई की शुरुआत एक शराब दुकान से हुई थी जहां रहवासी इलाके में शराब दुकान हटाने को लेकर जनता सड़क पर उतरी थी….शराब माफिया ने अपना दिखाते हुए रहवासियों से कहा आप लोग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे….

फिर क्या था जनता को ये बात चुभ गई जिसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया गया सुनवाई के बाद जो आदेश आया उसके बाद रहवासी इलाके में कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर हड़कंप मच गया….अब व्यापारी चर्चा कर रहे है शराब दुकान बंद हो जाती तो इतना रायता नहीं फैलता….

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रिटायरमेंट के बाद भी सरकारी कुर्सी का मोह छूट नही रहा

माला जपने की उम्र में 70 पार के साहब फाइलें चला रहे है और मजे से सरकारी सेवा की दूसरी पारी खेल रहे हैं मामला उस सैर-सपाटे वाले महकमे का है जहां 10 से ज्यादा ऐसे बुजुर्ग अधिकारी सेवाएं दे रहे हैं जो असल में इस विभाग के है ही नहीं…. यह सभी दूसरे सरकारी विभाग से रिटायर हुए, कोई किसी और महकमे से रिटायर्ड अधिकारी है… लेकिन रिटायरमेंट के बाद सबकी मंजिल एक ही- यही महकमा…. मतलब अपनी-अपनी पुरानी सरकारी नौकरी से विदाई ली और यहां आकर फिर सरकारी कुर्सी से दोस्ती कर ली।

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उम्र 70 पार है लेकिन नौकरी का उत्साह ऐसा जैसे अभी-अभी भर्ती हुए हों…. उधर युवा नौकरी के लिए एग्जाम दे-देकर थक रहे हैं इधर रिटायर्ड साहबों की दूसरी सरकारी पारी फुल मौज में चल रही है। और महकमा भी ऐसा जहां होटल, बजट और सुविधाओं का कामकाज है… तो भला साहब क्यों छोड़ें ये सैर-सपाटे वाली नौकरी
अब सवाल यही है रिटायरमेंट के बाद आराम करना था या सरकारी नौकरी का सीजन-2 खेलना था…..


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चतुर्थ श्रेणी वेतनमान की फाइल साहब ने अटकाई !

मध्य प्रदेश के कर्मचारी अलग-अलग मांगों को लेकर भोपाल की सड़कों पर आए दिन विरोध प्रदर्शन करते दिखाई देते हैं…. प्रदर्शन के कई कारण होते हैं लेकिन कुछ कारण अधिकारियों के लापरवाही के कारण भी होते हैं भोपाल में एक और बड़ा प्रदर्शन हो सकता है क्योंकि शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को मिलने वाले चतुर्थ श्रेणी वेतनमान विभाग के डिपार्टमेंट प्रमुख ने इसकी फाइल अटका रखी है…जबकि कर्मचारी रिटायर्ड होते जा रहे हैं।

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