राकेश चतुर्वेदी की कलम से

कलेक्टर लूट ले गए मंत्री जी की तवज्जो

बीते शुक्रवार पूरी सरकार जमीन पर उतरी तो मालवा निमाड़ क्षेत्र वाले नेता जी जिस तैयारी के बीच जनता के बीच पहुंचे, जैसे पूरे प्रभार वाले जिले का दिल जीत लेंगे। मंत्री जी पहुंचे उससे पहले ही कलेक्टर महोदय मौके पर मौजूद थे। सुनवाई के दौरान आवेदकों का ध्यान मंत्री जी से अधिक कलेक्टर पर रहा। बीच बीच में मंत्री जी ने अपनी ओर ध्यान आकर्षित कराने का प्रयास किया लेकिन जैसे ही दूसरा आवेदक आता तो उसका फोकस कलेक्टर पर रहता। शिविर के समापन के बाद बातों बातों में मंत्री जी ने कलेक्टर से कह भी दिया कि पीड़ितों का हमसे अधिक फोकस आप पर रहा। मंत्री जी के रवाना होने के बाद स्टाफ के बीच चर्चा का विषय बना रहा है कि मंत्री जी जो तवज्जो लेना चाहते थे वो कलेक्टर साहब ले गए।

दतिया मतगणना से पहले पूर्व मुख्यमंत्री की हुई अति गोपनीय बैठक

दतिया चुनाव के परिणाम से पहले पूर्व मुख्यमंत्री के सरकारी बंगले पर हुई इस बैठक में जिससे मुलाकात हुई उनका कद भी सीएम से कम नहीं था। एक घंटे दस मिनट तक चली इस बैठक में चर्चा तो कई विषयों पर हुई होंगी, लेकिन कयास यह लगाए जा रहे कि बैठक का मुख्य फोकस परिणाम था। बैठक गोपनीय रखी गई थी, लेकिन बंगले के स्टाफ की एक गलती के कारण जानकारी लीक हो गई। जानकारी बाजार में तैजी से फैल रही है कि परिणाम आने के पहले पूर्व मुख्यमंत्री जी कौन से समीकरण साधने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि जिस बंगले पर बैठक हुई वहां से भी बैठक की बातों को बाहर आने से रोकने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

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चुनाव से पहले वापसी की तैयारी, प्रदेश कार्यालय में फिर दिखेंगे बड़े नेता के बेटे

प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक नेता जी की वापसी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। खबर है कि एक बड़ी पार्टी के दिग्गज नेता के बेटे की प्रदेश कार्यालय में फिर से सक्रिय भूमिका में वापसी होने वाली है। खास बात ये है कि यह वापसी ऐसे समय हो रही है, जब आगे आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी के भीतर बैठकों और मेल मुलाकातों का दौर तेज हो गया है। लोकसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके ये नेता अब 2028 में आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे नजर आ रहे है। बड़ी बैठकों में मौजूदगी, पार्टी नेताओं से मुलाकात और लगातार कार्यकर्ताओं से संपर्क…सियासी गलियारों में इसे महज संयोग नहीं माना जा रहा है। चर्चा तो यहां तक है कि क्या लोकसभा चुनाव के बाद अब विधानसभा चुनाव के लिए नई रणनीति तैयार की जा रही है। क्या पार्टी संगठन में सक्रिय होकर अपनी राजनीतिक जमीन फिर मजबूत करने की कोशिश है। सालों से संगठन के लिए मेहनत करने वालों के बीच अब एक सवाल तैर रहा है। मेहनत किसी की और चुनावी फल किसी और की झोली में तो नहीं जाने वाला है। विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन नेताओं की सक्रियता देखकर सियासी चर्चाएं अभी से शुरू हो गई हैं। प्रदेश कार्यालय में होने वाली बैठकों से लेकर नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकियों तक…हर कदम के पीछे अब सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि ये सिर्फ संगठन में सामान्य वापसी है या फिर आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए किसी बड़े राजनीतिक प्लान की शुरुआत है।

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कलेक्टर-टीआई की जुगलबंदी

वैसे तो कलेक्टर कार्यालय से थाना प्रभारी का कोई लेना-देना नहीं होता, लेकिन एक टीआई साहब कलेक्टर कार्यालय के कुछ ज्यादा ही चक्कर लगा रहे हैं। थाना प्रभारी का प्रयास रहता है कि कलेक्टर महोदया की ओर से कोई आदेश आए तो मिनटों में हाजिर हो जाएं और सप्ताहभर तक कोई आदेश न आए तो कलेक्टर कार्यालय से आते-जाते दुआ-सलाम तो करते ही जाएं। इस दुआ-सलामी की चर्चाएं कलेक्टर कार्यालय से अधिक थाने में होती हैं। स्टाफ साहब के हाव-भाव से समझ जाता है कि कैसे भी कर के साहब आज तो सेल्यूट करने जाएंगे ही।

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