भारत सरकार ने पेट्रोल में 30% तक एथेनॉल मिश्रण (E30) की तैयारी शुरू कर दी है. ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने मई 2026 में E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन के नए गुणवत्ता मानक अधिसूचित किए हैं। देश में फिलहाल E20 यानी 20% इथेनॉल मिक्स पेट्रोल मौजूद है और देशभर में बिक्री हो रही है. ध्यान देने वाली बात ये है कि सरकार E30 पेट्रोल के लक्ष्य तक चरणबद्ध यानी धीरे-धीरे पहुंचेगी. इसकी वजह आम लोगों को होने वाली परेशानियों से बचाना है.

भारत सरकार अब पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को और बढ़ाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। मौजूदा E20 योजना के बाद अब E22, E25, E27 और E30 फ्यूल के लिए तकनीकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

भारत सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. E20 के बाद अब E22, E25, E27 और E30 लाने की तैयारी शुरू हो गई है. सरकार का उद्देश्य तेल आयात कम करना और प्रदूषण घटाना है. सरकार का मानना है कि इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने से भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी. कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी. पर्यावरण को भी फायदा होगा. हालांकि सरकार इस प्रक्रिया को एक साथ लागू नहीं करेगी. इथेनॉल मिश्रण को धीरे-धीरे यानी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा. यानी 20% से 30% तक का सफर धीरे-धीरे तय किया जाएगा ताकि ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित न हो और वाहनों के इंजन पर भी उल्टा असर न पड़े.

18 मई को जारी अधिसूचना में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने नए एथेनॉल मिश्रित ईंधनों के लिए मानक तय किए हैं। ये नियम 15 मई 2026 से लागू हो चुके हैं। फिलहाल देशभर में E20 फ्यूल को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में पेट्रोल में 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जा सकेगा।

इथेनॉल उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार कच्चे माल के स्रोत भी बढ़ा रही है. पहले इथेनॉल उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के गुड़ या शीरे से होता था, लेकिन अब मक्का, टूटे हुए चावल और अन्य अनाजों से भी इथेनॉल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है. 

उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता अब करीब 2 अरब लीटर तक पहुंच चुकी है, लेकिन तेल विपणन कंपनियों द्वारा इसकी खरीद अभी लगभग 1 अरब लीटर तक ही सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि, एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से किसानों, चीनी मिलों और बायोफ्यूल उद्योग को भी बड़ा लाभ मिल सकता है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में नीति आयोग की विशेषज्ञ समिति की अहम भूमिका रही है. इस समिति ने “रोडमैप फॉर इथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-25” रिपोर्ट जारी की थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने E20 लक्ष्य को वर्ष 2030 से पहले तक हासिल करने का फैसला किया. 

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