लखनऊ. उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियंका मौर्य ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने अखिलेश यादव के एनकाउंटर, महिलाओं को 40 हजार रुपये देने के वादे, पीडीए और एसटीएफ को लेकर दिए गए बयानों पर पलटवार किया. प्रियंका मौर्य ने कहा कि महिलाओं को चुनावी वादों से ज्यादा सम्मान और बराबरी का अधिकार चाहिए.

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’40 हजार रुपये नहीं, महिलाओं को सम्मान चाहिए’

प्रियंका मौर्य ने अखिलेश यादव के चुनाव जीतने पर महिलाओं को 40 हजार रुपये देने के वादे पर कहा कि महिलाओं को केवल आर्थिक लाभ का वादा नहीं, बल्कि सम्मान और बराबरी का अधिकार चाहिए. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में महिलाओं की भागीदारी और अधिकारों पर ज्यादा चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा कि अब महिलाएं चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं और जिस पक्ष के साथ महिलाएं जाएंगी, सरकार बनाने में उसकी भूमिका अहम होगी.

अखिलेश पर पत्नी के सम्मान को लेकर निशाना

प्रियंका मौर्य ने अखिलेश यादव पर उनकी पत्नी के सम्मान को लेकर भी निशाना साधा. कहा कि जो अपनी पत्नी के लिए एक शब्द भी नहीं बोल सकते, जो अपनी पत्नी के सम्मान के लिए तब खड़े नहीं हो सकते जब कोई मौलाना आकर उनकी पत्नी के बारे में बेतुकी बातें करता है? वे चुपचाप बैठे रहते हैं, जैसे मुंह पर ताला लगा हो. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में अखिलेश यादव महिलाओं के सम्मान की बात कैसे कर सकते हैं?

एनकाउंटर और पीडीए पर भी घेरा

अखिलेश यादव के जाति देखकर एनकाउंटर किए जाने के आरोप पर प्रियंका मौर्य ने कहा कि एनकाउंटर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई है और इसके बारे में आरोप लगाने से पहले संबंधित मामलों का इतिहास देखना चाहिए. उन्होंने समाजवादी पार्टी पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया. पीडीए को लेकर उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव खुद इस मुद्दे पर भ्रमित हैं और अलग-अलग तरीके से इसकी व्याख्या करते हैं.

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‘जनता सब समझती है, सही समय पर देगी जवाब’

सपा नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका मौर्य ने कहा कि जनता नेताओं की बात सुनती और परखती है. उन्होंने दावा किया कि सत्ता में वापसी के लिए अखिलेश यादव बेचैन हैं. साथ ही महिलाओं के अधिकारों को लेकर उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार प्राप्त हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और समानता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह की असमान सोच स्वीकार नहीं की जानी चाहिए.