सोनीपत। हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में बैकग्राउंड डांसरों के हक की लड़ाई अब बड़े कलाकारों की चुप्पी पर सवाल खड़े कर रही है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं डांसर सिम्मी ने दावा किया है कि सोशल मीडिया पर समर्थन देने वाले कलाकार अब तक मैदान में नहीं उतरे। उन्होंने सपना चौधरी समेत कई नामी चेहरों पर वादा निभाने में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि डांसर आज भी कम मेहनताना, लंबे वर्किंग आवर्स और असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं।

हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री के बैकग्राउंड डांसरों का आंदोलन एक महीने से ज्यादा समय से जारी है, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। बैकग्राउंड डांसर सिम्मी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि आंदोलन शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि इंडस्ट्री के बड़े चेहरे खुलकर साथ देंगे, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।

‘सपना चौधरी ने साथ देने का वादा किया था’

सिम्मी ने दावा किया कि सपना चौधरी ने करीब एक महीने पहले वीडियो जारी कर भरोसा दिलाया था कि वह दिल्ली लौटते ही सबसे पहले बैकग्राउंड डांसरों के बीच पहुंचेंगी और उनके आंदोलन का समर्थन करेंगी। लेकिन अब तक न कोई मुलाकात हुई और न ही कोई संपर्क किया गया।

‘ऑनलाइन सपोर्ट मिला, जमीनी साथ नहीं’

सिम्मी ने कहा कि केडी देसी रॉक समेत कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर समर्थन जताया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया था, लेकिन आंदोलन के दौरान कोई भी उनके बीच नहीं पहुंचा। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करना आसान है, लेकिन संघर्ष में साथ खड़ा होना सबसे बड़ी बात होती है।

18 घंटे काम, सुविधाएं नदारद

सिम्मी ने आरोप लगाया कि इंडस्ट्री में आज भी बैकग्राउंड डांसरों से 18-18 घंटे तक काम कराया जाता है। कई शूटिंग लोकेशन पर पीने का पानी, भोजन और आराम जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होतीं। महिला कलाकारों के लिए देर रात शूटिंग के बाद सुरक्षित घर पहुंचने की भी कोई व्यवस्था नहीं की जाती।

‘200 रुपये बढ़ाकर समझ लिया समस्या खत्म’

उन्होंने कहा कि आंदोलन के बाद मेहनताना सिर्फ 200 रुपये बढ़ाया गया। पहले जहां एक हजार रुपये मिलते थे, अब 1200 रुपये दिए जा रहे हैं। उनके मुताबिक यह बढ़ोतरी डांसरों की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि औपचारिकता भर है।

’20 साल काम करने वालों की भी हालत नहीं बदली’

सिम्मी का दावा है कि इंडस्ट्री में कई बैकग्राउंड डांसर पिछले 20 वर्षों से काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी स्थिति आज भी वैसी ही है। उनका कहना है कि केवल कुछ निर्माता और निर्देशक ही कलाकारों की सुविधाओं का ध्यान रखते हैं, जबकि अधिकांश जगहों पर कलाकारों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जाता है।

क्या हैं डांसरों की प्रमुख मांगें?

बैकग्राउंड डांसरों ने न्यूनतम वेतन तय करने, कार्य के घंटे निर्धारित करने, महिला कलाकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, शूटिंग के दौरान भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा एक मजबूत यूनियन के गठन की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।