जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस लाठीचार्ज की सामाजिक कार्यकर्ता प्रिया असीजा ने कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने केंद्र सरकार से पेपर लीक और भर्ती घोटालों में संलिप्त माफियाओं के खिलाफ कठोर कानून बनाकर त्वरित कार्रवाई करने की मांग की।

अजय सैनी, भिवानी। देश में लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनिश्चितता के माहौल से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे जाने की घटना की भिवानी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रिया असीजा ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी कहते थे कि “सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।” ऐसे में सभी नागरिकों का यह दायित्व है कि वे राजनीति की बजाए राष्ट्र हित को सर्वोपरि रखें।

तानाशाही रवैये की कड़े शब्दों में निंदा

प्रिया असीजा ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक, विशेषकर युवाओं को अपने अधिकारों और न्याय के लिए आवाज उठाने का संवैधानिक अधिकार है। देश का युवा कोई अपराधी नहीं है, जो उस पर इस तरह की बर्बरता की जाए। छात्र-छात्राएं सिर्फ अपने भविष्य की सुरक्षा और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग करने दिल्ली पहुंचे थे।

लाठीचार्ज की घटना पर रोष व्यक्त करते हुए प्रिया असीजा ने कहा कि ये छात्र ही देश की रीढ़ हैं। वे रात-दिन मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन अंतिम समय में पेपर लीक होने से उनकी सालों की मेहनत पानी में मिल जाती है।

जब यही छात्र-छात्राएं न्याय मांगने पहुंचे, तो उन पर लाठियां बरसाई गईं और आंसू गैस के गोले दागे गए। यह पूरी तरह से निंदनीय और तानाशाही रवैया है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए, न कि जायज मांग उठा रहे छात्र-छात्राओं की आवाज को बलपूर्वक दबाना चाहिए।

पेपर लीक पर कठोर कानून की मांग

प्रिया असीजा ने केंद्र सरकार से बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने मांग रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार को तुरंत एक ऐसा कठोर और विशेष कानून अमल में लाना चाहिए, जिससे पेपर लीक और भर्ती घोटालों में संलिप्त पाए जाने वाले माफिया, अधिकारियों और दोषियों पर बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई हो सके।

दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बने, ताकि भविष्य में कोई भी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। सभी राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय हो।

मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य पर आघात

सामाजिक कार्यकर्ता प्रिया असीजा ने जोर देकर कहा कि पेपर लीक की घटनाएं सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना भर नहीं हैं, बल्कि यह लाखों परिवारों की उम्मीदों और छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात हैं। कई छात्र-छात्राएं वर्षों तक तैयारी में अपने परिवार की गाढ़ी कमाई लगाते हैं और अंत में निराशा हाथ लगती है।

उन्होंने सरकार को सचेत करते हुए कहा कि यदि युवाओं को समय पर रोजगार, निष्पक्ष परीक्षाएं और सुरक्षित भविष्य नहीं मिला, तो देश का विकास प्रभावित होगा। सरकार को अपनी प्रशासनिक विफलताओं को स्वीकार करते हुए इन छात्रों की बात को सुनना चाहिए और तुरंत पेपर लीक जैसी घटनाओं पर स्थायी रोक लगानी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने छात्र-छात्राओं से भी अपील की कि वे किसी भी अफवाह या बहकावे में आने की बजाए अपनी मांगों के प्रति सजग रहें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात को सरकार के समक्ष रखें।