पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अदालत के आदेश के बावजूद निजी अस्पताल के बजाय सरकारी अस्पताल ले जाने पर इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की है. अदालत ने उन्हें शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने का आदेश दिया था, लेकिन उन्हें कुछ देर पिम्स में रखकर वापस जेल भेज दिया गया. पार्टी का कहना है कि यह भी अदालत के आदेश का उल्लंघन है.

पीटीआई के कानूनी सलाहकार नईम पंजुथा ने बताया कि याचिका में प्रधानमंत्री, कानून मंत्री, सूचना मंत्री और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.

इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने पाकिस्तान की शहबाज सरकार के खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है. अदालत ने उन्हें इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश दिया था. लेकिन उन्हें कुछ देर पिम्स में रखकर वापस जेल भेज दिया गया.

इमरान खान की पार्टी PTI का आरोप है कि इस दौरान इमरान खान को उनके निजी डॉक्टरों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई. पार्टी का कहना है कि यह भी अदालत के आदेश का उल्लंघन है. पीटीआई नेताओं का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से 27 सितंबर को होने वाले विरोध मार्च की तैयारियों को और ताकत मिलेगी.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को सरकार को निर्देश दिया था कि इमरान खान को रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल से दो दिन के भीतर निजी शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए.

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने शनिवार को कहा कि 73 वर्षीय इमरान खान का मेडिकल चेकअप पारदर्शी तरीके से कराया गया और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन किया. वहां मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें फिट बताया, जिसके बाद उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया. सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने शुक्रवार को कहा कि सुरक्षा कारणों की वजह से खान को पिम्स ले जाया गया था.

इमरान खान की पार्टी PTI का मानना है कि अदालत का आदेश यह भी कहता है कि खान को कम से कम सितंबर के मध्य तक मेडिकल निगरानी में रखा जाना चाहिए. इमरान खान की बहन उज़मा खान भी पिम्स में हुई जांच के दौरान वहां मौजूद थीं.

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