पंजाब सरकार ने शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरण सुधार के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। इसके तहत राज्य में पहली बार जापानी मियावाकी तकनीक की मदद से 650 शहरी सूक्ष्म वन विकसित किए जाएंगे। वन विभाग ने इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया है और सभी जिलों के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं।

इन सूक्ष्म वनों का निर्माण शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, औद्योगिक इकाइयों और न्यायिक परिसरों में किया जाएगा। प्रत्येक वन लगभग 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित होगा। योजना का उद्देश्य शहरों में ‘ऑक्सी वन’ जैसी हरित जगहें तैयार करना है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हो और जैव विविधता को बढ़ावा मिले।

मियावाकी तकनीक के तहत 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में 35 से 40 प्रजातियों के 400 से 500 पौधे लगाए जाएंगे। पौधों को बहुत कम दूरी पर रोपा जाएगा, जिससे वन का घनत्व अधिक होगा और कम समय में घना हरित क्षेत्र विकसित हो सकेगा। इन वनों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के साथ फलदार पौधे भी शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे घने वन पक्षियों, कीट-पतंगों और छोटे जीवों के लिए अनुकूल आवास बनाते हैं, जिससे पारिस्थितिक संतुलन मजबूत होता है।

परियोजना के तहत जालंधर डिवीजन में सबसे अधिक 82 सूक्ष्म वन विकसित किए जाएंगे, जबकि लुधियाना में 71, बठिंडा में 56, होशियारपुर में 53 और अमृतसर में 48 वन बनाए जाएंगे। अन्य जिलों में भी निर्धारित संख्या के अनुसार सूक्ष्म वन विकसित किए जाएंगे और उनके लिए स्थान चिन्हित किए जा रहे हैं। विशेष बात यह है कि पहली बार न्यायिक परिसरों को भी वन विभाग की किसी हरित योजना में शामिल किया गया है।

इसके अलावा राज्य सरकार 45 पवित्र वन (Sacred Forests) भी विकसित करेगी। करीब डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाले प्रत्येक पवित्र वन में 400 पौधे लगाए जाएंगे, जो समय के साथ घने हरित क्षेत्र का रूप लेंगे। ये वन मुख्य रूप से अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित किए जाएंगे।

हरित अभियान को और व्यापक बनाने के लिए नगर निकायों की सीमाओं के भीतर 43,300 पौधे लगाए जाएंगे। वहीं, नगर निकाय क्षेत्रों से बाहर विभिन्न सड़कों के किनारे पांच किलोमीटर तक 45,500 पौधों का रोपण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य राज्य में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को मजबूत करना है।