चंडीगढ़: पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) सिर्फ घर-घर दस्तक ही नहीं दे रहे, बल्कि कई ऐसे इलाकों तक भी पहुंच रहे हैं जहां जाने के लिए उन्हें उफनती नदियां, बाढ़ और बेहद कठिन रास्तों का सामना करना पड़ रहा है। भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे दूरस्थ गांवों में तैनात BLO यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

नाव के सहारे पहुंचते हैं सीमावर्ती गांव

गुरदासपुर जिले के भरयाल गांव में तैनात BLO विक्रम सिंह रोजाना रावी नदी पार कर अपने कार्यस्थल तक पहुंचते हैं। मकाउरा पट्टन से छोटी नाव के जरिए वह गांव पहुंचते हैं, क्योंकि बरसात के दिनों में यह इलाका मुख्य भूमि से पूरी तरह कट जाता है। स्थानीय ग्रामीण ही उन्हें नाव से गांव तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चुनौती

विक्रम सिंह ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के बाद रावी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है, जिससे यात्रा जोखिमभरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा काम पूरा करने की कोशिश की। अब तक लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं का सत्यापन किया जा चुका है और अभियान अभी जारी है।

हर साल बाढ़ से प्रभावित होता है भरयाल

करीब 369 मतदाताओं वाले भरयाल गांव में लगभग हर साल बाढ़ आती है। ऐसे समय में कई परिवार आसपास के गांवों में अस्थायी रूप से चले जाते हैं। BLO को इन सभी लोगों का पता लगाकर उनका सत्यापन करना पड़ता है। भरयाल और टूर गांव दीनानगर (एससी) विधानसभा क्षेत्र के सबसे दुर्गम इलाकों में गिने जाते हैं, जहां एक ओर पाकिस्तान की सीमा और दूसरी ओर रावी नदी है।

50 गांवों तक पहुंचना सबसे कठिन

पंजाब के लगभग 12,500 गांवों में से 50 गांव ऐसे हैं जिन्हें सबसे दुर्गम माना जाता है। इन गांवों तक सड़क संपर्क बेहद सीमित है और मानसून के दौरान अस्थायी पंटून पुल भी हटा दिए जाते हैं। ऐसे में नाव ही आवाजाही का एकमात्र साधन बन जाती है। अधिकारियों के अनुसार अकेले गुरदासपुर जिले में ऐसे 15 गांव हैं, जबकि अजनाला, धर्मकोट और भोआ विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिलती है।

सेना की नाव बनी सहारा

विक्रम सिंह ने बताया कि एक बार भरयाल से लौटते समय अचानक आई बाढ़ के कारण नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि स्थानीय नावों का संचालन बंद करना पड़ा। ऐसे में सेना ने अपनी नावों और लाइफ जैकेट की मदद से उन्हें सुरक्षित वापस पहुंचाया। बाढ़ के दौरान सेना ही इन इलाकों में राहत और आवागमन की जिम्मेदारी संभालती है।

कालूवाला: पंजाब का ‘आइलैंड विलेज’

फिरोजपुर जिले का कालूवाला गांव तीन ओर से सतलुज नदी और चौथी ओर भारत-पाकिस्तान सीमा से घिरा हुआ है। इसी वजह से इसे पंजाब का ‘आइलैंड विलेज’ कहा जाता है। यहां पहुंचने के लिए अधिकतर समय नाव का सहारा लेना पड़ता है। लगातार बाढ़ और सीमावर्ती परिस्थितियों के कारण गांव की आबादी घटकर करीब 200 लोगों तक सिमट गई है।

सतलुज पार कर पूरा कर रहे मतदाता सत्यापन

टेंडीवाला सरकारी स्कूल के शिक्षक दर्शन सिंह और पुष्पा ग्रोवर भी BLO के रूप में कालूवाला गांव में मतदाता सत्यापन का कार्य कर रहे हैं। दोनों रोजाना सतलुज नदी नाव से पार कर गांव पहुंचते हैं। दर्शन सिंह ने बताया कि गांव के 150 मतदाताओं में से करीब 82 प्रतिशत का सत्यापन पूरा हो चुका है। वहीं पुष्पा ग्रोवर ने कहा कि पंटून पुल हटने के बाद अब रोजाना नाव से ही गांव पहुंचना उनकी दिनचर्या बन चुकी है।

सीमावर्ती गांवों में लोकतंत्र की ड्यूटी

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, बाढ़ और सीमावर्ती चुनौतियों के बावजूद पंजाब के BLO लोकतंत्र की सबसे अहम प्रक्रिया को मजबूत करने में जुटे हैं। उनका उद्देश्य यही है कि राज्य के सबसे दूर बसे नागरिक का भी नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज रहे और कोई भी मतदाता अपने अधिकार से वंचित न हो।

पंजाब के सीमावर्ती गांवों में BLO की चुनौती: नाव, बाढ़ और सेना के सहारे हो रहा वोटर लिस्ट सत्यापन
Meta Description (150–160 characters):
पंजाब के सीमावर्ती गांवों में BLO नाव और सेना की मदद से बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर SIR अभियान के तहत मतदाता सूची का सत्यापन कर रहे हैं।