चंडीगढ़। पंजाब में धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले पराली प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह खेतों में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करने के पक्ष में नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र से मांग की कि धान की खेती करने वाले किसानों को पराली नहीं जलाने के बदले नकद प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।


मान शुक्रवार को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय किसान मेले का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए केवल कार्रवाई का रास्ता अपनाने के बजाय उन्हें आर्थिक मदद दी जानी चाहिए।


किसानों को प्रति एकड़ 3 हजार रुपये देने की मांग
किसान संगठनों की ओर से पराली के प्रबंधन के लिए 3,000 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता की मांग की जा रही है। किसानों का तर्क है कि धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच समय बहुत कम होता है। ऐसे में खेत से पराली हटाने पर अतिरिक्त खर्च आता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान खुद भी पराली जलाना नहीं चाहते, क्योंकि इससे निकलने वाला धुआं सबसे पहले उनके अपने स्वास्थ्य और खेतों के वातावरण को प्रभावित करता है।


‘हर बार पंजाब के किसानों को ठहराया जाता है जिम्मेदार’

भगवंत मान ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों को हर साल प्रदूषण के लिए कटघरे में खड़ा किया जाता है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, केंद्र सरकार पंजाब द्वारा केंद्रीय पूल में दिए जाने वाले धान का आंकड़ा तो बताती है, लेकिन इससे पैदा होने वाली पराली की मात्रा और उसके प्रबंधन की लागत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
उन्होंने FIR दर्ज करने की सलाह पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों के खिलाफ मामले दर्ज करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

पाकिस्तान के पंजाब का भी किया जिक्र

मान ने पाकिस्तान के पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज द्वारा लाहौर में धुएं को लेकर पत्र लिखे जाने की बात का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि हवा में केवल पंजाब का ही धुआं नहीं हो सकता। उनके अनुसार हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत अन्य क्षेत्रों से होने वाले उत्सर्जन को भी प्रदूषण के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मान ने कहा कि पंजाब को प्रदूषण के मुद्दे पर लगातार बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करने के सवाल पर कहा कि उनका किसानों पर FIR दर्ज करने का मन नहीं करता।

किसान नेताओं ने पुराने केस वापस लेने की मांग उठाई
भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को सबसे पहले किसानों के खिलाफ पहले से दर्ज FIR वापस लेनी चाहिए। उन्होंने मान के बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए इसे चुनावी संदर्भ में दिया गया बयान बताया।
वहीं, बीकेयू लाखोवाल के नेता हरिंदर सिंह लाखोवाल ने भी किसानों को पराली प्रबंधन के लिए नकद प्रोत्साहन देने की मांग दोहराई।

पराली जलाने पर FIR और जुर्माने का प्रावधान

पराली जलाने के मामलों में कार्रवाई के तहत FIR दर्ज करने के साथ पर्यावरण मुआवजे के रूप में जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री किए जाने का प्रावधान भी है। किसान संगठनों का कहना है कि इससे किसानों को बैंक से ऋण लेने या जमीन बेचने जैसी प्रक्रियाओं में परेशानी हो सकती है।
तीन साल में 86 फीसदी कम हुए पराली जलाने के मामले
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों में कमी दर्ज की गई है। 2023 में 36,663 घटनाओं के मुकाबले 2025 में 5,114 मामले सामने आए। इस तरह 2023 से 2025 के बीच मामलों में करीब 86 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
वर्षवार आंकड़ों के अनुसार 2024 में 10,909, 2022 में 49,922, 2021 में 71,304, 2020 में 76,590, 2019 में 55,210 और 2018 में 50,590 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई थीं। संगरूर, मानसा, बठिंडा और अमृतसर सहित कई जिलों में पराली जलाने के मामले बड़ी संख्या में सामने आते रहे हैं।

किसानों को मशीनों पर सब्सिडी भी दी जा रही

पराली प्रबंधन के लिए पंजाब सरकार गांव और ब्लॉक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाती है। किसानों को पराली को खेत में मिलाने या बाहर निकालने के लिए विभिन्न कृषि मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
इनमें सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर, मल्चर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड प्लाउ, जीरो टिल ड्रिल, बेलर और रेक जैसी मशीनें शामिल हैं।
व्यक्तिगत किसानों को कृषि उपकरणों की लागत पर 50 फीसदी तक सब्सिडी, जबकि सहकारी समितियों और पंचायतों को 80 फीसदी तक सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान है।