बरनाला/चंडीगढ़। उत्तर भारत में मौसम के मिजाज में आए अचानक बदलाव ने पंजाब के अन्नदाताओं की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। फरवरी के महीने में ही तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस बार गर्मियों ने समय से पहले दस्तक दे दी है। मौसम का यह बदला हुआ रूप सीधे तौर पर फसलों, खासकर गेहूं की पैदावार को प्रभावित कर सकता है।
पंजाब के किसान, विशेषकर बरनाला जिले के गांवों के किसान इस समय काफी परेशान हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल इस समय अपने चरम (Peaking stage) पर है और इसे पकने के लिए अभी लगभग डेढ़ महीने का समय और चाहिए। गेहूं की फसल को इस अवस्था में ठंडे मौसम की जरूरत होती है, लेकिन पिछले दो-तीन दिनों से गर्मी में जो अचानक बढ़ोतरी हुई है, वह दानों की क्वालिटी बिगाड़ सकती है।

किसानों का डर है कि यदि इसी तरह गर्मी बढ़ती रही, तो गेहूं के दाने सही ढंग से विकसित नहीं होंगे और वे समय से पहले सूख सकते हैं। गर्मी के कारण दाने पतले रह जाएंगे, जिससे प्रति एकड़ पैदावार में भारी गिरावट आने की आशंका है।
बरनाला के गांवों में 95% जमीन पर गेहूं की खेती
बरनाला के सनखेड़ा और वजीदके कलां जैसे गांवों के किसानों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके क्षेत्र की लगभग 10,000 एकड़ भूमि में से 95 फीसदी हिस्से पर गेहूं की बुआई की गई है। किसानों के अनुसार, पिछले साल पहले ही बेमौसमी बारिश और बाढ़ ने धान की फसल को भारी नुकसान पहुँचाया था और अब गेहूं की फसल पर मौसम की मार उन्हें आर्थिक रूप से तोड़ सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि तापमान में यह अस्थिरता ‘क्लाइमेट चेंज’ का असर है। पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था काफी हद तक गेहूं के उत्पादन पर टिकी है।
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