चंडीगढ़। पंजाब के किसान नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान किसानों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों, पंजाब के जल संकट, कर्ज और एमएसपी जैसे बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दों पर चर्चा की और महामहिम को एक मांग पत्र सौंपा। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि किसानों के हितों की अनदेखी की गई, तो देश में एक बार फिर बड़ा किसान आंदोलन शुरू हो सकता है।

मुलाकात के बाद भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील का कड़ा विरोध किया। राजेवाल ने कहा कि भारतीय किसान, अमेरिकी किसानों को मिलने वाली उन्नत तकनीक और भारी-भरकम सब्सिडी का मुकाबला नहीं कर सकते। ऐसे में अमेरिका के साथ कृषि व्यापार समझौता भारतीय किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर देगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनता के सामने भले ही इनकार कर रही हो, लेकिन पिछले दरवाजे से फलों और अन्य कृषि उत्पादों के नाम पर इस समझौते को शामिल करने की कोशिश की जा रही है। राजेवाल ने पंजाब के पानी की गिरती गुणवत्ता पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पंजाब के कई क्षेत्रों में जमीन के नीचे के पानी में यूरेनियम की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इस दूषित पानी के कारण राज्य में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

किसानों ने मांग की कि सरकार सिंचाई और पीने के लिए नहरी पानी की आपूर्ति बढ़ाए, ताकि दूषित भूजल पर लोगों की निर्भरता को कम किया जा सके। उन्होंने पुनर्गठन अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब की नदियों को सिर्फ इसलिए अंतर्राज्यीय नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि वे दूसरे राज्यों से गुजरती हैं। पंजाब को उन प्रावधानों से मुक्त किया जाए जो उसके जल स्रोतों को प्रभावित करते हैं।


भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड पर चर्चा करते हुए किसान नेता ने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं में भारी वित्तीय योगदान देने के बावजूद पंजाब को फैसले लेने की प्रक्रियाओं से साइडलाइन (अलग) कर दिया गया है। उन्होंने डैम सेफ्टी एक्ट को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यह कानून बुनियादी ढांचे और परियोजनाओं पर पंजाब के नियंत्रण को कमजोर करता है। इस मुद्दे पर उन्होंने केंद्र सरकार के साथ एक विशेष बैठक की मांग की।