चंडीगढ़। वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि नशे के विरुद्ध पंजाब सरकार की निर्णायक कार्रवाई के सार्थक नतीजे मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब नशे पर अपनी कार्रवाई और लोगों की भागीदारी को मजबूत कर रहा है, वहीं हरियाणा के सीएम नायब सैनी सरकार के तहत हरियाणा में बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
चीमा ने कहा कि ऐसा पैटर्न अब हरियाणा में भी देखा जा रहा है। हरियाणा पुलिस ऑफिसर सुनील संधू का जिक्र करते हुए, जिन पर एंटी-ड्रग ऑपरेशन के बाद कार्रवाई हो रही है, चीमा ने पूछा कि हरियाणा भाजपा सरकार किसे बचाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सैनी के पंजाब के बार-बार दौरे इस बात का इशारा करते हैं कि नशा तस्कर फिर से इकट्ठा होने और वापसी का रास्ता ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हरियाणा खुद इस संकट में और डूबता जा रहा है। चीमा ने कहा कि नशा तस्कर पंजाब छोड़कर हरियाणा को अपना नया ठिकाना बना रहे हैं। चीमा ने कहा कि पंजाब ने 2007-2017 के अकाली-भाजपा शासन के दौरान नशों के फैलने का खामियाजा भुगता है। भाजपा-अकाली सरकार के दौरान ही पंजाब में हेरोइन और ‘चिट्टा’ जैसे ड्रग्स फैले थे।

उन्होंने दावा किया कि 2022 में सीएम भगवंत मान के नेतृत्व में आप सरकार के सत्ता में आने के बाद ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ आंदोलन शुरू किया था, जो सफल रहा है।
उन्होंने कहा कि एक खास सब कमेटी बनाई गई और जिलों में कोऑर्डिनेशन मीटिंग की गईं। हाल ही में गांव सुरक्षा कमेटियों के 1.5 लाख से ज्यादा सदस्यों ने नशा विरोधी आंदोलन का समर्थन करने की शपथ ली, जो बड़े पैमाने पर लोगों की भागीदारी दिखाता है।
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