अमृतसर। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि राजस्थान पर पंजाब का 1.44 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। यह गणना 1960 से लेकर 2026 तक की गई है। मान के अनुसार, राजस्थान 1920 के समझौते के तहत पानी ले रहा है, लेकिन उसका भुगतान नहीं कर रहा है। राजस्थान सरकार ने पंजाब के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि पानी की रॉयल्टी के इस दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है।
अंतरराज्यीय नहर जल पर रॉयल्टी या फीस वसूलने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। पानी एक राष्ट्रीय संसाधन है और इसे संवैधानिक व्यवस्था के तहत साझा किया जाता है।
राजस्थान द्वारा दावे को खारिज किए जाने पर मुख्यमंत्री मान ने तंज कसते हुए कहा कि चोरी करने वाला कभी खुद नहीं मानता कि उसने चोरी की है, उसे मनाना पड़ता है। जिस तरह पुलिस चोर से अन्य चोरियां भी कबुलवा लेती है, वैसे ही हम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। राजस्थान को अपनी बात अदालत में कहनी चाहिए।
पंजाब का तर्क है कि यदि राजस्थान 1920 के समझौते के तहत पानी ले रहा है, तो उसे भुगतान भी उसी के अनुसार करना चाहिए। यदि भुगतान नहीं करना, तो समझौता खत्म कर पानी की सप्लाई पर पुनर्विचार होना चाहिए।

राजस्थान फीडर के जरिए फिलहाल लगभग 18,000 क्यूसेक पानी जा रहा है, जिसका कोई वित्तीय भुगतान पंजाब को नहीं मिल रहा है। सीएम मान ने सवाल उठाया कि 1960 के बाद यह भुगतान प्रणाली बंद क्यों हुई? यदि पहले भुगतान किया जाता था, तो अब क्यों नहीं?
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