अनूप दुबे, कटनी। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर करोड़ों रुपए फूंक दिए जाते हैं। बेहतरीन व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके इतर है। धरातल में कई जगह ऐसे हैं जहां अस्पताल की सुविधा नहीं होने पर झोलाछाप डॉक्टर इसका फायदा उठाकर झोपड़ी में हॉस्पिटल संचालित कर रहे हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों के अस्पताल को बांस-बल्लियों का सहारा
दरअसल, स्वास्थ्य व्यवस्था को ठेंगा दिखाने का मामला विजयराघवगढ़ विकासखंड में देखने को मिला है। जहां ग्राम पंचायत सिगुनपुरा के ग्राम बकेली में जर्जर झोपड़ी में निखिलेश्वर चिकित्सालय के नाम से अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। यह पूरा अस्पताल एक कच्चे झोपड़ी के भीतर सिमटा हुआ है। झोपड़ी की छत को थामने के लिए लगाई गई लकड़ी का उपयोग मेडिकल स्टैंड के रूप में किया जा रहा है। उसी लकड़ी के सहारे रस्सी से बांधकर एक महिला मरीज को ग्लूकोज की बोतल (ड्रिप) चढ़ाई जा रही है।
दवाइयों का भारी भरकम स्टॉक
बता दें कि यहां भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां और इंजेक्शन बरामद हुए हैं। डस्ट और संक्रमण से भरे इस माहौल में मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा था। इससे मरीज स्वस्थ होने के बजाय और गंभीर बीमारी से संक्रमित हो सकता था।
मिली जानकारी के अनुसार, निखिलेश्वर चिकित्सालय का संचालन डॉ. सी. पी. सिंह नाहर (आयुष) और डॉ. भूपेंद्र सिंह नाहर (B.Sc. Be.MS) नामक व्यक्ति कर रहे थे। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना उचित विशेषज्ञता और अनुमतियों के इस तरह असुरक्षित माहौल में एलोपैथिक पद्धतियों से धड़ल्ले से इलाज किया जा रहा है, जिससे हर वक्त मरीजों की जान पर खतरा मंडराता रहता है
CMHO ने बताया गंभीर मामला
घटना की जानकारी सामने आने पर स्वास्थ्य महकमा हरकत में आ गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राज सिंह ठाकुर ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि किसी भी झोपड़ी या बिना मान्यता/अधिकृत भवन के भीतर क्लीनिक या अस्पताल का संचालन करना पूरी तरह से नियम विरुद्ध और अवैध है।
इस मामले को संज्ञान में लेते हुए हमने विकासखंड स्तर पर एक विशेष जांच टीम का गठन कर दिया है। टीम को मौके पर जाकर पूरे मामले की सूक्ष्मता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में जो भी तथ्य और खामियां सामने आएंगी, उसके आधार पर संबंधितों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

