शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए एक लिखित उत्तर का हवाला देते हुए कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने EOW की भूमिका और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े छह वर्षों में EOW को 23,000 से अधिक शिकायतें मिलीं, लेकिन चालान केवल 9 मामलों में ही अदालत तक पहुंच सका।

19 हजार से अधिक शिकायतों का पता नहीं

कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि विधानसभा में मिले जवाब के अनुसार- वर्ष 2020 से जून 2026 के बीच EOW को कुल 23,261 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 3,018 शिकायतें दर्ज की गईं और 756 शिकायतों को नस्तीबद्ध (फाइल क्लोज) कर दिया गया। 19,487 शिकायतों की वर्तमान स्थिति क्या है, इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। विधायक ने आरोप लगाया कि EOW द्वारा शिकायत दर्ज होने या नस्तीबद्ध होने की कोई भी आधिकारिक सूचना शिकायतकर्ताओं को नहीं दी जाती है।

258 मामलों में FIR, केवल 9 में चालान

विधायक ग्रेवाल ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा कि दर्ज 3,018 शिकायतों में से सिर्फ 258 मामलों में ही अपराध (FIR) दर्ज किया गया। हद तो तब हो गई जब इन 258 मामलों में से भी पिछले साढ़े छह सालों में केवल 9 मामलों में ही अदालत में चालान पेश किया जा सका। कई मामलों में तो प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में ही 6 साल तक का लंबा समय लग गया।

रतलाम सीवरेज घोटाले की जांच पर खड़े किए सवाल

ग्रेवाल ने रतलाम नगर निगम की सीवरेज परियोजना में हुए कथित ₹100 करोड़ के बड़े भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मामले की शिकायत EOW में की गई थी, लेकिन EOW ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय शिकायत उसी संबंधित विभाग को वापस भेज दी जिस पर गड़बड़ी के आरोप थे। कांग्रेस विधायक ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि EOW की कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार किया जाए और पारदर्शी व्यवस्था बनाते हुए हर तीन महीने में शिकायतकर्ताओं को जांच की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।

EOW के चौंकाने वाले आंकड़े (2020 से जून 2026)

कुल प्राप्त शिकायतें: 23,261
दर्ज शिकायतें: 3,018
नस्तीबद्ध (फाइल क्लोज): 756
लापता/अस्पष्ट शिकायतें: 19,487
दर्ज अपराध (FIR): 258
कोर्ट में पेश चालान: केवल 09

मुख्य आरोप

एफआईआर दर्ज करने में लग रहे 6-6 साल।
शिकायतकर्ताओं को नहीं दी जाती जांच की कोई सूचना।
आरोपी विभाग को ही जांच सौंपने का लगा आरोप।

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