Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा की राजनीति में इस समय एक नया तूफान खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है। 256 सदस्यों वाली इस भारी-भरकम ‘जंबो टीम’ के गठन के साथ ही पार्टी के भीतर चर्चाओं और अंदरूनी कलह का दौर शुरू हो गया है। आइए जानते हैं कि आखिर इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में इतनी हलचल क्यों मची हुई है।
ओडिशा कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास में आज तक इतनी बड़ी टीम कभी नहीं बनाई गई। आमतौर पर पीसीसी की टीम 30 से 35 सदस्यों तक सीमित होती थी, लेकिन इस बार का दायरा बहुत बड़ा कर दिया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि इस सूची में कई ऐसे चेहरों को भी शामिल किया गया है जो लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हैं और कांग्रेस भवन के कार्यक्रमों में भी नजर नहीं आते। इस नए ढांचे में 40 सदस्यों की एक ‘सलाहकार समिति’ बनाई गई है। पार्टी के राष्ट्रीय संविधान में इस तरह की किसी विशिष्ट समिति का स्पष्ट प्रावधान न होने और पारंपरिक पदों (जैसे उपाध्यक्ष या महासचिव) की जगह इसमें नेताओं को रखे जाने से वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी साफ देखी जा रही है।
मुख्य कार्यकारिणी समिति के सदस्यों की संख्या को भी बढ़ाकर 71 कर दिया गया है।तमाम आलोचनाओं और सवालों के बीच पीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने बहुत सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी है। उन्होंने सभी नवचयनित सदस्यों को बधाई देते हुए कहा:
“कांग्रेस की किसी भी समिति में स्थान पाना ही अपने आप में एक बड़ी बात है। पदों को लेकर बयानबाजी करने के बजाय सभी को दल को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए। आपस के मतभेदों को भूलकर सभी नेता और कार्यकर्ता मिलकर प्रयास करें ताकि ओडिशा में कांग्रेस एक बार फिर जनता का विश्वास जीतकर सत्ता में वापसी कर सके।”
वहीं, दूसरी ओर पूर्व पीसीसी अध्यक्ष जयदेव जेना ने इस विशाल टीम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ओडिशा कांग्रेस में इतनी बड़ी समिति कभी नहीं बनी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईकमान अध्यक्ष को अपनी टीम चुनने की पूरी स्वतंत्रता देता है:
“यदि परिणाम अच्छे आते हैं तो उसका श्रेय अध्यक्ष को मिलता है, और यदि प्रदर्शन खराब रहता है तो उसकी जवाबदेही भी अध्यक्ष की ही होती है। किन आधारों को ध्यान में रखकर इतनी बड़ी कमेटी बनाई गई है, यह खुद पीसीसी अध्यक्ष ही बेहतर बता सकते हैं।”
भक्त चरण दास ने सभी गुटों को साथ लेकर चलने का संदेश देने के लिए यह बड़ा दांव तो खेल दिया है, लेकिन क्या यह भारी-भरकम टीम जमीन पर कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित होगी या अंदरूनी कलह को और बढ़ाएगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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